रायपुर न्यूज़ धमाका // मां मैं तुझसे बनी हूं, तेरी ही परछाई हूं। एक बेटी का अपनी मां के प्रति कुछ ऐसा ही भाव होता है। मां भी अपनी बेटी की सुरक्षा के लिए कुछ भी करने को तैयार रहती है। कुछ ऐसी ही कहानी है कोंडागांव की मां अर्चना शर्मा और उनकी बेटी खुशी की। दोनों एक साथ राज्य ओपन स्कूल से 12वीं की पढ़ाई कर रही हैं।
इस कहानी में आपके सामने ‘निल बटे सन्नाटा’ फिल्म की तस्वीर सामने आ जाएगी। कुछ साल पहले आई इस फिल्म में मां-बेटी के रिश्ते और उनकी पढ़ाई को लेकर बखूबी दिखाया गया है। फिल्म में मां अपनी बेटी के लिए काम करती है और उसे पढ़ाती है ताकि बेटी का भविष्य बेहतर हो और बाद में मां स्वयं अपनी बेटी के स्कूल में दाखिला लेती है और इस तरह बेटी के सपनों को जीना शुरू कर देती है। फिल्म का जिक्र हम इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि पढ़ाई के लिए जज्बे की ऐसी ही एक मिसाल बन रही हैं छत्तीसगढ़ के काेंडागांव की मां अर्चना शर्मा और उनकी बेटी खुशी।
मां अर्चना 24 साल बाद अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए अपनी बेटी के साथ छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल से 12वीं की पढ़ाई कर रही हैं। इसके पहले दोनों ने एक साथ 10वीं की पढ़ाई पूरी की है। दरअसल, बेटी अकेले ओपन स्कूल की संपर्क कक्षाओं में जाती इसलिए बेटी की सुरक्षा के साथ-साथ उसका हौसला बढ़ाने के लिए मां अर्चना ने साथ में ही पढ़ने का फैसला ले लिया।
माता-पिता की मौत के बाद नहीं हो पाई थी पढ़ाई
अर्चना शर्मा बताती हैं ‘मेरा मायका भिलाई के रिसाली में है। शारदा विद्यालय भिलाई से कक्षा सातवीं तक पढ़ी थी। इसके बाद 10वीं की परीक्षा मध्यप्रदेश बोर्ड से दी लेकिन उसमें पूरक आ गई। दुर्भाग्य से माता-पिता की मौत हो गई। शादी के बाद कोंडागांव में आ गई है। अर्चना ने बताया कि उनके पति मनोज शर्मा दुकान चलाते हैं। उनके साथ वह गृहस्थी में जुट गई। एक बेटी खुशी और बेटा पंकज के लालन-पालन करती रहीं पर मन में एक टीस थी कि अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाई हूूं। इसलिए बेटी के साथ खुद भी पढ़ना शुरू कर दिया। अर्चना घर में सिलाई का काम करके कुछ खर्च निकालती हैं।
पढ़ाई के लिए जुनून देखकर अफसर भी दंग
शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कोंडागांव के प्राचार्य नरेंद्र कुमार नायक और प्रभारी जयंत कुमार मजूमदार बताते हैं कि दोनों मां-बेटी ओपन स्कूल के कक्षा 12वीं में कला संकाय में पढ़ रही हैं। दाेनों संपर्क कक्षा में भी शामिल होती हैं। यह हमारे के लिए गर्व का विषय है।
राज्य सरकार की मंशा है कि हर कोई पढ़े और आगे बढ़े। यह ओपन स्कूल की बड़ी उपलब्धि है कि मां-बेटी दोनों एक साथ पढ़ रही हैं।

