
रायपुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर कोरबा कलेक्टर अजीत वसंत और पूर्व गृह मंत्री ननकीराम कंवर के बीच विवाद ने नया मोड़ ले लिया है।
अब इस विवाद में टोल प्लाजा से जुड़ी कथित हिस्सेदारी का मामला सामने आने के बाद पूरे प्रशासनिक गलियारों में हलचल मच गई है।
कलेक्टर हटाने की मांग और जांच समिति
ननकीराम कंवर ने बीते 22 सितंबर को मुख्यमंत्री को 14 बिंदुओं वाला शिकायत पत्र भेजकर कोरबा कलेक्टर को तत्काल हटाने की मांग की थी।
उन्होंने चेतावनी दी थी कि तीन दिनों में कार्रवाई नहीं होने पर वे मुख्यमंत्री निवास के सामने धरना देंगे, हालांकि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव के हस्तक्षेप के बाद उन्होंने धरना स्थगित कर दिया।
इस शिकायत की जांच बिलासपुर संभागायुक्त सुनील कुमार जैन की अध्यक्षता में गठित समिति कर रही है। समिति की रिपोर्ट अब लगभग तैयार है, लेकिन इसी बीच एक नया खुलासा सामने आया है जिसने पूरे मामले को और पेचीदा बना दिया है।
टोल प्लाजा विवाद से जुड़ा नया खुलासा
सूत्रों के मुताबिक, ननकीराम कंवर की शिकायत के बिंदु क्रमांक 5 में जिस प्रेमचंद पांडेय का नाम दर्ज था, उन्हीं के खिलाफ रायपुर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 174 के तहत मामला दर्ज किया है।
यह धारा अहस्तक्षेपीय अपराध से जुड़ी है, लेकिन परिवादी पक्ष ने रायपुर कोर्ट में परिवाद पत्र दाखिल किया है। अदालत ने इसे सुनवाई योग्य मानते हुए 11 नवंबर की तारीख तय की है।
बताया जा रहा है कि प्रेमचंद पांडेय ने मदनपुर टोल प्लाजा में कथित हिस्सेदारी के लिए मेसर्स विनोद कुमार जैन फर्म के साथ साझेदारी की थी। उन्होंने फर्म के खाते में ₹96.90 लाख जमा किए, लेकिन भुगतान और एग्रीमेंट को लेकर विवाद हो गया।
आरोप है कि इसी विवाद के दौरान प्रेमचंद पांडेय ने परिवादी को जान से मारने की धमकी दी थी।
ननकीराम और कलेक्टर की बैठक के बाद बिगड़े रिश्ते
दिलचस्प बात यह है कि मार्च 2024 में प्रेमचंद पांडेय, ननकीराम कंवर के साथ कलेक्टर अजीत वसंत से मिलने गए थे।
प्रशासनिक सूत्रों का दावा है कि इसी बैठक के बाद से ननकीराम और कलेक्टर के बीच मतभेद शुरू हुए।
सूत्र बताते हैं कि बैठक के दौरान टोल प्लाजा में हिस्सेदारी से जुड़े कुछ मसलों पर कलेक्टर पर दबाव बनाने की कोशिश की गई, लेकिन कलेक्टर ने किसी भी रियायत से इंकार कर दिया।
इसके बाद से ही ननकीराम कंवर कलेक्टर के खिलाफ खुलकर मुखर हो गए।
जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
फिलहाल, इस मामले की आधिकारिक जांच जारी है और सभी की निगाहें अब संभागायुक्त सुनील कुमार जैन की रिपोर्ट पर टिकी हैं।
यह रिपोर्ट तय करेगी कि कलेक्टर अजीत वसंत के खिलाफ लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है,
और क्या वाकई ननकीराम कंवर की नाराजगी के पीछे कोई निजी स्वार्थ या व्यावसायिक हित छिपे हैं।
राजनीतिक हलकों में चर्चा
इस पूरे विवाद ने प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा छेड़ दी है।
बीजेपी के वरिष्ठ नेता इस मामले को “प्रशासनिक लापरवाही” बता रहे हैं,
वहीं कांग्रेस इसे “दबाव की राजनीति” करार दे रही है।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस रिपोर्ट के आने के बाद कलेक्टर के तबादले या क्लीनचिट पर फैसला ले सकती है।
मुख्य बिंदु संक्षेप में
- पूर्व गृह मंत्री ननकीराम कंवर ने कोरबा कलेक्टर के खिलाफ शिकायत की थी।
- जांच में टोल प्लाजा हिस्सेदारी विवाद का एंगल आया सामने।
- प्रेमचंद पांडेय पर धमकी देने का मामला दर्ज।
- मार्च 2024 की मुलाकात के बाद बिगड़े रिश्ते।
- जांच रिपोर्ट आने के बाद तय होगा मामला राजनीतिक है या प्रशासनिक।
संपादकीय टिप्पणी:
छत्तीसगढ़ की नौकरशाही और राजनीति के बीच चल रही यह तनातनी केवल व्यक्तिगत विवाद नहीं, बल्कि राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक स्वायत्तता के बीच के संतुलन की परीक्षा बन गई है।
अब देखना यह है कि संभागायुक्त की रिपोर्ट किस पक्ष को सही ठहराती है।
