22 जून 2026 //

राम मंदिर चंदा चोरी मामले की जांच कर रही एसआईटी ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि सुरक्षा चेकिंग, ड्रेस कोड और सीसीटीवी नियमों की घोर अनदेखी करके प्राइवेट कर्मचारियों से नोट गिनवाए जा रहे थे
अयोध्या के राम मंदिर में भक्तों के चढ़ावे के पैसों में हुई हेराफेरी की जांच कर रही विशेष जांच टीम की पड़ताल में सुरक्षा और प्रबंधन के स्तर पर बेहद चौंकाने वाली और गंभीर लापरवाहियां सामने आई हैं। मंदिर परिसर में दानपात्रों को खाली कराने से लेकर बैंक में पैसे जमा कराने तक हर स्तर पर घोर मनमानी चल रही थी।
एसआईटी की जांच में खुलासा हुआ है कि राम मंदिर ट्रस्ट की बैंकिंग गतिविधियों का जिम्मा संभाल रहे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने नोटों को अलग कराने, गड्डियां बनवाने और उनकी गिनती करने का ठेका वाराणसी की एक प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसी को दे रखा था। इस प्राइवेट एजेंसी के कर्मचारी सुरक्षा के तय नियमों और ड्रेस कोड का पूरी तरह उल्लंघन करके बेहद अनियंत्रित तरीके से करोड़ों रुपये की नकदी को संभाल रहे थे।
न एंट्री पर चेकिंग और न कोई ड्रेस कोड, घरेलू कपड़ों में बैठकर गिने जा रहे थे नोट
एसआईटी की टीम को पड़ताल में पता चला कि ड्यूटी पर आने-जाने के दौरान कर्मचारियों की कोई बुनियादी जांच या चेकिंग तक नहीं की जाती थी। कौन कर्मचारी रूम के भीतर क्या लेकर आ रहा है और वहां से क्या लेकर बाहर जा रहा है, इसका कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं था। सभी कर्मचारियों के लिए प्रबंधन ने एक विशेष ड्रेस कोड बनाया था और उन्हें पोशाक भी दी गई थी, लेकिन नोट गिनने के दौरान कोई भी कर्मचारी इसका पालन नहीं करता था।
कर्मचारी अपने साधारण घरेलू कपड़ों में ही राम मंदिर ट्रस्ट के मुख्य कमरे में बैठकर नोटों की गिनती करने लगते थे। सबसे हैरान करने वाली बात सीसीटीवी कैमरों की फुटेज में सामने आई है, जहां साफ दिख रहा है कि चोरी करने के लिए कर्मचारी जानबूझकर कैमरों के सामने आकर खड़े हो जाते थे और बड़ी आसानी से नकदी पार कर देते थे।
सिफारिशों के आधार पर मिली नौकरियां
इस पूरे घोटाले की जड़ में भाई-भतीजावाद और बिना जांच-पड़ताल के की गई नियुक्तियों को मुख्य वजह माना जा रहा है। जांच में सामने आया कि प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसी ने राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोगों की सिफारिश पर अयोध्या के ही स्थानीय लड़कों को नोट गिनने के काम में रख लिया था। इसी प्रथा के तहत मामले के मुख्य आरोपी अनुकल्प मिश्र ने अपने साले लवकुश मिश्र को ट्रस्ट में नौकरी पर लगवा दिया था, जिसने बाद में अन्य साथियों के साथ मिलकर इस गबन को अंजाम दिया।
एसआईटी ने अब तक लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुण और रामशंकर की निशानदेही पर 2 करोड़ रुपये की नकद रिकवरी कर ली है। जांच को प्रभावित होने से रोकने के लिए एसआईटी ने कड़ा रुख अपनाते हुए दायरे में आए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के बिना पूर्व सूचना अयोध्या छोड़ने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है।

हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में याचिका दायर, कैग ऑडिट और सीबीआई जांच की मांग
मंदिर प्रबंधन की इस घोर लापरवाही का मामला अब विधिक मोर्चे पर भी गर्मा गया है। राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि के इस कथित गबन और वित्तीय विसंगतियों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिस पर सोमवार को कोर्ट नंबर 2 में सुनवाई संभावित है।
याचिकाकर्ता पक्ष के अधिवक्ता मोहित अशोक शर्मा ने बताया कि इस याचिका के जरिए पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा मंदिर ट्रस्ट के खातों का विशेष ऑडिट कराने की मांग की गई है।
एसआईटी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपने के लिए अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट को अंतिम रूप दे दिया है, जिसके आधार पर आने वाले दिनों में ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में बहुत बड़ा फेरबदल होना निश्चित है।



