
29 जुलाई 2026 //
अयोध्या न्यूज़ धमाका – गुरु पूर्णिमा पर अयोध्या की पवित्र सरयू नदी में लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। इस अवसर पर पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार संत-गुरुओं से जुड़े स्थलों और पौराणिक धरोहरों के संरक्षण व विकास पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है।
गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर बुधवार को रामनगरी अयोध्या आस्था और श्रद्धा के रंग में पूरी तरह सराबोर नजर आई। तड़के भोर से ही बड़ी संख्या में देश के कोने-कोने से पहुंचे श्रद्धालुओं ने सरयू नदी के विभिन्न घाटों पर विधि-विधान से पुण्य स्नान किया। स्नान के पश्चात भक्तों ने श्रीरामजन्मभूमि, हनुमानगढ़ी, कनक भवन और मठ-मंदिरों में जाकर गुरु पूजन, दर्शन और भजन-कीर्तन में हिस्सा लिया तथा अपने गुरुजनों का आशीर्वाद प्राप्त किया।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बधाई देते हुए कहा कि गुरु पूर्णिमा भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और गुरु परंपरा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का महान पर्व है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार महर्षि वेदव्यास, संत रविदास और गुरु गोरखनाथ जैसी महान विभूतियों से जुड़े स्थलों के संरक्षण और आध्यात्मिक पर्यटन सुविधाओं का तेजी से विस्तार कर रही है।
सरयू घाटों और मंदिरों में दिनभर उमड़ी रही श्रद्धालुओं की भारी भीड़
गुरु पूर्णिमा के चलते अयोध्या के प्रमुख स्नान घाटों, विशेषकर नया घाट और राम की पैड़ी पर दिनभर श्रद्धालुओं की भारी चहल-पहल रही। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और स्थानीय प्रशासन के जवान प्रमुख स्थलों पर मुस्तैद रहे।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए घाटों पर बैरिकेडिंग और चेंजिंग रूम्स की विशेष व्यवस्था की गई। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने हनुमानगढ़ी में बजरंगबली के दर्शन किए और फिर रामलला के दरबार में हाजिरी लगाकर सुख-समृद्धि की कामना की।

सरयू स्नान का धार्मिक महत्व
पौराणिक एवं सनातन परंपरा में गुरु पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान और दान का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या स्थित पावन सरयू नदी में गुरु पूर्णिमा के दिन स्नान करने से साधक के सभी पापों का शमन होता है और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
शास्त्रों में उल्लेख है कि सरयू केवल एक नदी नहीं, बल्कि भगवान श्रीहरि विष्णु के नेत्रों के अश्रुबिंदु से प्रकट हुई प्रत्यक्ष देवस्वरूपिणी तरंगिणी हैं।