छतीसगढ़नगरी

सिहावा-बस्तर और ओडिशा के देवताओं का भव्य मिलन, निभाई गई पारंपरिक न्याय व्यवस्था बोराई जंगल में सजा भंगाराव माई का दरबार : 

05 सितम्बर 2026 //

नगरी न्यूज़ धमाका – धमतरी के बोराई जंगल में भंगाराव माई का अनोखा देव दरबार, जहां 16 परगना सिहावा, 20 कोस उड़ीसा और 7 पाली बस्तर के देवी-देवताओं का मिलन होता है।

भंगाराव माई की सर्वोच्च शक्ति का दरबार 

मान्यता के अनुसार इस दरबार में यदि किसी इष्ट देवी-देवता से कोई भूल या गलती हो जाती है तो उसे भंगाराव माई के दरबार में प्रस्तुत किया जाता है। देव परंपरा के अनुसार संबंधित देवी-देवता को कटघरे में खड़ा कर उसके संबंध में जवाब लिया जाता है। स्थानीय मान्यता में भंगाराव माई को इस देव दरबार की सर्वोच्च शक्ति माना जाता है और परंपरागत विधान के अनुसार दोषी माने जाने वाले देवता के संबंध में निर्णय लिया जाता है। कुछ मामलों में देवता को प्रतीकात्मक रूप से हिरासत में रखने की परंपरा भी बताई जाती है।

16 परगना सिहावा से लेकर बस्तर और ओडिशा के देवता शामिल

भंगाराव माई के इस देव दरबार में 16 परगना सिहावा, 20 कोस उड़ीसा और 7 पाली बस्तर क्षेत्र से जुड़े देवी-देवताओं के आने की परंपरा रही है। बड़ी संख्या में देवी-देवताओं के प्रतीक स्वरूप डांग, छत्र, पालकी एवं अन्य पारंपरिक प्रतीकों के साथ श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। इस दौरान बोराई क्षेत्र में मेला जैसा माहौल बन जाता है और दूर-दराज से हजारों श्रद्धालु इस अनोखी परंपरा के साक्षी बनने पहुंचते हैं।

बस्तर राजपरंपरा से जुड़ी है मान्यता

स्थानीय ऐतिहासिक एवं लोकमान्यता के अनुसार सिहावा क्षेत्र का संबंध कभी बस्तर राजपरिवार की देव परंपराओं से रहा है। आदिवासी समाज में पीढ़ियों से चली आ रही देव परंपराओं और मान्यताओं का आज भी श्रद्धापूर्वक पालन किया जाता है। इसी परंपरा के तहत भंगाराव माई के देव दरबार को विशेष महत्व प्राप्त है।

स्थानीय मान्यता है कि भंगाराव माई की अनुमति के बिना देव सीमा में कोई भी देवी-देवता महत्वपूर्ण धार्मिक कार्य नहीं कर सकते। यही वजह है कि भादो माह में आयोजित होने वाला यह देव दरबार क्षेत्र के विभिन्न गांवों और दूरस्थ अंचलों के लिए विशेष धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व रखता है।

आस्था, परंपरा और संस्कृति का अद्भुत संगम

बोराई का यह देव दरबार केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की सदियों पुरानी लोक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और देव परंपरा का जीवंत स्वरूप माना जाता है। यहां इंसानी अदालत की तरह देवी-देवताओं की पेशी और निर्णय की मान्यता लोगों के लिए कौतूहल के साथ-साथ गहरी आस्था का विषय है।

स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार भंगाराव माई का दरबार उनकी आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां देव परंपरा के अनुसार देवी-देवताओं से जुड़े मामलों का विधानपूर्वक निराकरण किया जाता है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही यह अनोखी परंपरा आज भी आदिवासी संस्कृति और लोकविश्वास को जीवंत बनाए हुए है।

Chhattisgarh News Dhamaka Team

अमन चीफ एडिटर - छत्तीसगढ़ न्यूज़ धमाका // प्रदेश उपाध्यक्ष, छग जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन छत्तीसगढ // ; हरिभूमि ब्यूरो चीफ जिला कोंडागांव // 18 सालो से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। विश्वसनीय, सृजनात्मक व सकारात्मक पत्रकारिता में विशेष रूचि। कृषि, वन, शिक्षा; जन जागरूकता के क्षेत्र की खबरों को हमेशा प्राथमिकता। जनहित के समाचारों के लिये तत्परता व् समर्पण// जरूरतमंद अनजाने की भी मदद कर देना पहली प्राथमिकता

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