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पुराने साथियों से गले मिलकर रोए 50 पूर्व माओवादियों की गढ़चिरौली पुनर्वास केंद्र से बस्तर वापसी आंसुओं के साथ हुई विदाई

03 सितम्बर 2026 //

बस्तर न्यूज़ धमाका – महाराष्ट्र के गढ़चिरौली स्थित पुनर्वास केंद्र में रह रहे 50 पूर्व माओवादियों को उनके गृहक्षेत्र बस्तर के अलग-अलग जिलों के लिए रवाना किया गया, विदाई के दौरान भावुक हुए साथी।

 कभी जंगलों में हथियारों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने वाले और संगठन के लिए जान तक देने को तैयार रहने वाले पूर्व माओवादियों की जिंदगी अब एक नया मोड़ ले रही है। महाराष्ट्र के गढ़चिरौली स्थित पुनर्वास केंद्र में रह रहे 50 पूर्व माओवादियों को उनके गृहक्षेत्र बस्तर के अलग-अलग जिलों के लिए रवाना किया गया। विदाई के दौरान ऐसा भावुक दृश्य सामने आया कि वहां मौजूद लोग भी कुछ पल के लिए ठहर गए।

विदाई में छलके आंसू, पुराने साथियों से गले मिलकर रोए

रवानगी से पहले पूर्व माओवादी एक-दूसरे से गले मिलते नजर आए। लंबे समय तक साथ जंगलों में रहने वाले इन लोगों के लिए यह विदाई बेहद भावुक रही। किसी ने साथी को गले लगाया तो किसी की आंखों से आंसू छलक पड़े। कभी हथियारों के साए में बीती जिंदगी के साथी अब सामान्य जीवन की ओर लौटते हुए एक-दूसरे से विदा लेते दिखाई दिए।

आत्मसमर्पण के बाद बदली जिंदगी की दिशा

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में पिछले साल पूर्व माओवादी नेता वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति के नेतृत्व में बड़ी संख्या में माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था। सुरक्षा कारणों से इन्हें पुलिस के पुनर्वास केंद्र में रखा गया। इस दौरान उन्हें मुख्यधारा में लौटने और आत्मनिर्भर बनने के लिए अलग-अलग तरह की ट्रेनिंग दी गई।
कई पूर्व माओवादियों को रोजगार से जुड़ी स्किल ट्रेनिंग दी गई, जबकि कुछ के रिवर्स नसबंदी ऑपरेशन भी कराए गए। वहीं, कुछ पूर्व माओवादी जोड़ों ने पुनर्वास केंद्र में ही विवाह कर नई जिंदगी की शुरुआत की।

अब अपने गांव लौट रहे पूर्व माओवादी

पुनर्वास प्रक्रिया के अगले चरण में अब आत्मसमर्पण कर चुके लोगों को धीरे-धीरे उनके गृह जिलों और गांवों में वापस भेजा जा रहा है। इसी क्रम में पहले चरण के तहत 50 पूर्व माओवादियों को गढ़चिरौली से बस्तर के अलग-अलग इलाकों में उनके गृहग्राम के लिए रवाना किया गया। इस कदम को आत्मसमर्पण के बाद उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाने की दिशा में अहम पहल माना जा रहा है।

जम्पन्ना ने उठाए पुनर्वास प्रक्रिया पर सवाल

हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया को लेकर पूर्व माओवादी नेता जिनुगु नरसिम्हा रेड्डी उर्फ जम्पन्ना ने सवाल उठाए हैं। प्रेस नोट जारी कर उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को लंबे समय तक पुलिस निगरानी वाले पुनर्वास केंद्र में रखने के बजाय जल्द से जल्द उनके परिवार और गांव तक पहुंचाया जाना चाहिए। उनका कहना है कि आत्मसमर्पण के बाद लोगों को सामान्य जीवन में लौटने का अवसर मिलना चाहिए और उन्हें अपने परिवार व समाज के बीच जल्द बसने दिया जाना चाहिए।

हथियारों से दूर, सामान्य जिंदगी की ओर कदम

गढ़चिरौली से बस्तर लौट रहे इन 50 पूर्व माओवादियों की कहानी सिर्फ एक स्थान से दूसरे स्थान तक लौटने की नहीं, बल्कि जिंदगी की दिशा बदलने की कहानी भी है। कभी हाथों में हथियार थे, आज वही हाथ अपनों और पुराने साथियों को विदाई देते नजर आए। जंगल के संघर्ष से गांव की जिंदगी तक का यह सफर बताता है कि आत्मसमर्पण के बाद इनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अब हथियार नहीं, बल्कि सामान्य जीवन में खुद को फिर से स्थापित करना है।

Chhattisgarh News Dhamaka Team

अमन चीफ एडिटर - छत्तीसगढ़ न्यूज़ धमाका // प्रदेश उपाध्यक्ष, छग जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन छत्तीसगढ // ; हरिभूमि ब्यूरो चीफ जिला कोंडागांव // 18 सालो से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। विश्वसनीय, सृजनात्मक व सकारात्मक पत्रकारिता में विशेष रूचि। कृषि, वन, शिक्षा; जन जागरूकता के क्षेत्र की खबरों को हमेशा प्राथमिकता। जनहित के समाचारों के लिये तत्परता व् समर्पण// जरूरतमंद अनजाने की भी मदद कर देना पहली प्राथमिकता

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