
01 सितम्बर 2026 //
जगदलपुर न्यू धमाका – इंद्रावती टाइगर रिजर्व (ITR) ने वन्यजीवों के शिकार और जंगलों में अवैध कटाई पर अंकुश लगाने के लिए सीमावर्ती इलाकों में निगरानी व्यवस्था और मजबूत कर दी है।
इंद्रावती टाइगर रिजर्व (ITR) ने वन्यजीवों के शिकार और जंगलों में अवैध कटाई पर अंकुश लगाने के लिए सीमावर्ती इलाकों में निगरानी व्यवस्था और मजबूत कर दी है। महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्रप्रदेश की सीमा से लगे जंगलों में वन विभाग की टीमें नियमित गश्त कर रही हैं। दुर्गम और संवेदनशील इलाकों को चिन्हित कर वहां विशेष निगरानी रखी जा रही है।
टाइगर रिजर्व का बड़ा हिस्सा घने जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में फैला है। ऐसे इलाकों में भौगोलिक परिस्थितियों का फायदा उठाकर शिकारी वन्यजीवों को निशाना बना सकते हैं, वहीं अवैध कटाई और लकड़ी के परिवहन की भी आशंका रहती है। इसी को देखते हुए आईटीआर प्रबंधन ने सीमावर्ती क्षेत्रों में पेट्रोलिंग बढ़ाने का फैसला लिया है।
गश्त के दौरान वन्यजीवों की गतिविधियों के साथ जंगल में आने-जाने वाले संदिग्ध लोगों और वाहनों पर भी नजर रखी जा रही है। इसके अलावा जंगल से लकड़ी के अवैध परिवहन को रोकने के लिए भी वन अमले को सतर्क किया गया है।
ग्रामीणों से भी मांगा जा रहा सहयोग
वन विभाग की टीमें सीमावर्ती गांवों के ग्रामीणों से संपर्क कर उन्हें जंगल में होने वाली संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तत्काल देने के लिए जागरूक कर रही हैं। विभाग का मानना है कि स्थानीय लोगों के सहयोग से वन अपराधों पर प्रभावी तरीके से लगाम लगाई जा सकती है।
तीन राज्यों की सीमा से जुड़े होने के कारण वन अपराधों की रोकथाम के लिए संबंधित क्षेत्रों के अमले के बीच समन्वय पर भी जोर दिया जा रहा है। आवश्यकता पड़ने पर संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पेट्रोलिंग टीमों को तैनात किया जाएगा।
100 किमी क्षेत्र में बनेंगे पेट्रोलिंग कैंप
इंद्रावती टाइगर रिजर्व के क्षेत्रीय निदेशक उत्तम कुमार गुप्ता ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्र में करीब 100 किलोमीटर के दायरे में लगभग हर 7 किलोमीटर पर आईटीआर के कैंप स्थापित किए जाएंगे। इन कैंपों को इस तरह संचालित किया जाएगा कि पेट्रोलिंग के दौरान टीमें एक-दूसरे से संपर्क में रहें।
इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए आईटीआर के डीएफओ, एसडीओ और परिक्षेत्र अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य सीमावर्ती जंगलों में वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ अवैध कटाई और अन्य वन अपराधों पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।
शिकारियों पर रहेगी पैनी नजर
शिकार की आशंका वाले संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर वहां निगरानी बढ़ाई गई है। वन अमला जंगल के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंचकर गश्त कर रहा है। संदिग्ध गतिविधि, अवैध पेड़ कटाई या लकड़ी के परिवहन की जानकारी मिलने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।



