बस्तरजगदलपुर

फिर से 9.88 करोड़ खर्चने की तैयारी दलपत सागर के पानी में समा गए करोड़ों रुपये फिर भी जलकुंभी से पटा पड़ा है तालाब,

01 सितम्बर 2026 //

जगदलपुर न्यूज़ धमाका – जगदलपुर के दलपत सागर की सफाई पर फिर करोड़ों खर्च होंगे। इस ऐतिहासिक तालाब में 13 करोड़ से अधिक खर्च के बाद भी जलकुंभी का संकट बरकरार है।

 बस्तर की ऐतिहासिक पहचान और रियासतकालीन विरासत दलपत सागर को जलकुंभी से मुक्त कराने के लिए एक बार फिर बड़े स्तर पर कवायद शुरू हो गई है। करीब 340 एकड़ में फैले इस ऐतिहासिक तालाब की सफाई और संरक्षण पर पिछले वर्षों में करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद जलकुंभी की समस्या खत्म नहीं हो सकी है। अब प्रशासन ने नए मास्टर प्लान के तहत इसके कायाकल्प की तैयारी की है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि पुराने प्रयासों के बावजूद समस्या स्थायी रूप से क्यों नहीं सुलझी।

NMDC के CSR फंड से शुरू होगी सफाई

दलपत सागर को जलकुंभी मुक्त करने के लिए नगर निगम और NMDC के बीच समझौता हुआ है। इसके तहत NMDC अपने CSR फंड से करीब 50 लाख रुपये की सहायता देगी। इसमें से 20 लाख रुपये की पहली किस्त जारी भी की जा चुकी है। इस राशि से फिलहाल सघन सफाई अभियान चलाकर जलकुंभी हटाने का काम शुरू किया जा रहा है।

15 साल में 13 करोड़ से ज्यादा खर्च का दावा

दलपत सागर की सफाई और सौंदर्यीकरण पर खर्च की कहानी नई नहीं है। पिछले करीब 15 वर्षों में विभिन्न कार्यों के नाम पर 13 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाने का दावा किया गया है। नगर निगम की वर्ष 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, अकेले जलकुंभी हटाने पर करीब 3 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। इसमें करीब 90 लाख रुपये की वीड हार्वेस्टर मशीन की खरीद भी शामिल है, जिसका इस्तेमाल जलकुंभी हटाने के लिए किया गया।

9.88 करोड़ से होगा दलपत सागर का कायाकल्प

साल 2021 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दलपत सागर के विकास के लिए करीब 3.5 करोड़ रुपये की घोषणा की थी। इसके तहत राजा दलपत देव की प्रतिमा, परिक्रमा पथ, स्ट्रीट लाइट, घाट निर्माण और फ्लोटिंग रेस्टोरेंट समेत कई परियोजनाएं प्रस्तावित की गई थीं। हालांकि इनमें से कई योजनाएं अब भी पूरी तरह धरातल पर नजर नहीं आतीं। अब प्रशासन ने दलपत सागर के लिए नए मास्टर प्लान के तहत काम आगे बढ़ाने का दावा किया है। मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना के तहत दलपत सागर के विकास के लिए 9 करोड़ 88 लाख रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है। नगर निगम का लक्ष्य मार्च 2027 तक दलपत सागर को पूरी तरह जलकुंभी मुक्त करना है।

सिर्फ सफाई नहीं, स्थायी समाधान जरूरी

दलपत सागर की सबसे बड़ी चुनौती केवल मौजूदा जलकुंभी को हटाना नहीं, बल्कि उसके दोबारा पनपने पर रोक लगाना है। शहर के कई नालों का गंदा और प्रदूषित पानी दलपत सागर में पहुंचने की बात सामने आती रही है। इससे जलकुंभी के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनती हैं। ऐसे में विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यदि गंदे नालों के पानी का स्थायी डायवर्जन और सागर में बेहतर जलप्रवाह की व्यवस्था नहीं की गई, तो बार-बार सफाई पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद जलकुंभी की समस्या दोबारा सामने आ सकती है।

पुराने खर्च का हिसाब और नए प्लान की चुनौती

दलपत सागर को बचाने के लिए अब एक बार फिर बड़ी राशि खर्च की जा रही है। लेकिन पुराने खर्च और योजनाओं के अपेक्षित परिणामों को लेकर सवाल भी बरकरार हैं। अब नई योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रशासन जलकुंभी हटाने के साथ-साथ उसके मूल कारणों को दूर करने में कितना सफल होता है।

Chhattisgarh News Dhamaka Team

अमन चीफ एडिटर - छत्तीसगढ़ न्यूज़ धमाका // प्रदेश उपाध्यक्ष, छग जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन छत्तीसगढ // ; हरिभूमि ब्यूरो चीफ जिला कोंडागांव // 18 सालो से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। विश्वसनीय, सृजनात्मक व सकारात्मक पत्रकारिता में विशेष रूचि। कृषि, वन, शिक्षा; जन जागरूकता के क्षेत्र की खबरों को हमेशा प्राथमिकता। जनहित के समाचारों के लिये तत्परता व् समर्पण// जरूरतमंद अनजाने की भी मदद कर देना पहली प्राथमिकता

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