रायपुर न्यूज धमाका – भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत हुए 43 करोड़ रुपए से अधिक के मुआवजा घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन पटवारियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए पटवारियों को बुधवार को ईओडब्लू की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से कोर्ट ने उन्हें चार नवंबर तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
गिरफ्तार पटवारियों में नायकबांधा के तत्कालीन पटवारी दिनेश पटेल, टोकरो के तत्कालीन पटवारी लेखराम देवांगन और भेलवाडीह की तत्कालीन पटवारी बसंती धृतलहरे शामिल हैं। आरोप है कि इन तीनों ने वर्ष 2020 से 2024 के बीच भू-माफियाओं के साथ मिलकर भूमि अधिग्रहण में भारी अनियमितताएं कीं और शासन को करोड़ों रुपए की आर्थिक क्षति पहुंचाई।
इस तरह रचा गया था घोटाला
ईओडब्लू की जांच में सामने आया कि पटवारियों ने भू-माफिया और कुछ निजी व्यक्तियों के साथ मिलकर भूमि का बैक डेट में बंटवारा और नामांतरण कर कूटरचित दस्तावेज तैयार किए। इसके बाद पहले से अधिग्रहित जमीन को दोबारा शासन को बेचा गया और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मुआवजा राशि प्राप्त की गई।
कई मामलों में वास्तविक जमीन मालिकों की जगह दूसरों को मुआवजा दिलाने, और निजी भूमि को सरकारी अधिग्रहण में दिखाकर टुकड़ों में बांटकर भुगतान लेने के प्रमाण भी मिले हैं।
पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियां
इस घोटाले में ईओडब्लू और एसीबी अब तक 10 से अधिक लोगों — जिनमें जमीन दलाल और कुछ सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं — को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस फर्जीवाड़े से सरकार को भारी वित्तीय नुकसान हुआ है।
हाईकोर्ट ने खारिज की थी अग्रिम जमानत याचिकाएं
मामले में शामिल आधा दर्जन से ज्यादा आरोपियों, जिनमें तत्कालीन एसडीएम निर्भय साहू भी शामिल हैं, ने ईओडब्लू की कार्रवाई के खिलाफ और गिरफ्तारी से बचने के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं।
28 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि मामला गंभीर आर्थिक अनियमितताओं से जुड़ा है और जांच प्रारंभिक चरण में है। इसलिए आरोपियों को अग्रिम जमानत देना जांच को प्रभावित कर सकता है। कोर्ट ने सभी याचिकाएं खारिज कर दीं।
ईओडब्लू अब इस मुआवजा घोटाले से जुड़े अन्य अधिकारियों और भू-माफियाओं की भूमिका की भी जांच कर रही है।



