
रायपुर,न्यूज़ धमाका :- राष्ट्रीय आयुर्वेद मंच द्वारा विज्ञान दिवस पर आनलाइन राष्ट्रीय वेबिनार आयोजित किया गया। इस वर्चुअल संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य और चिकित्सा के क्षेत्र में भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए आयुर्वेद को `राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति` घोषित करना था। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने आयुर्वेद की व्यापकता को बढ़ाकर इस दिशा में सक्रिय होकर प्रयास करने की आवश्यकता बताई।
केमिकल से हर्बल मेडिसिन को तरफ बढ़ना उद्देश्य
रविशंकर विश्वविद्यालय , इलेक्ट्रॉनिक विभाग तथा विज्ञान भारती, छत्तीसगढ़ के प्रमुख प्रोफेसर संजय तिवारी ने बताया कि आयुर्वेद आयु का विज्ञान है। 28 फरवरी के दिन रमन प्रभाव की खोज हुई थी, इसलिए 28 फरवरी को विज्ञान दिवस मनाया जाता है। सीवी रमन स्वदेश में पढ़े और युवा पीढ़ी को संदेश दिया कि हमारे देश में केवल आध्यात्मिक चिंतन ही नहीं बल्कि विज्ञान भी सम्मिलित है। यूके और ब्रिटेन में आयुर्वेदिक औषधियों को महत्व दिया जाता है। अश्वगंधा को तनाव मुक्ति और स्फूर्ति प्रदान करने वाली योग्य मेडिसिन माना जाता है,और हमारे देश में आयुर्वेद के कम प्रचार -प्रसार के कारण आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को कम महत्ता दी जाती है, जबकि कोरोना काल में पूरे विश्व में आयुर्वेदिक औषधियों ,जड़ी- बूटियों ,हल्दी आदि द्वारा लोगों को स्वस्थ किया जा सका। लोगों का आयुर्वेद के प्रति विश्वास बढ़ा है। अतः हमें केमिकल मेडिसिन से हर्बल मेडिसिन की ओर बढ़ना है।
