
31 अगस्त 2026 //
नेपाल न्यूज़ धमाका – नेपाल में 26 अगस्त को भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई विनाशकारी बाढ़ की वजह को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। नेपाल पर्यावरण सोसायटी द्वारा जारी प्रारंभिक अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, यह तबाही अत्यधिक बारिश या ग्लेशियल झील (GLOF) के फटने से नहीं, बल्कि लांगटांग-लिरुंग क्षेत्र में 5,200 मीटर की ऊंचाई से विशाल हिमस्खलन और चट्टानों के गिरने से आई थी।
नेपाल के उत्तरी और मध्य हिस्सों में 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ ने व्यापक तबाही मचाई थी। शुरुआती दौर में इसे बादल फटने या ग्लेशियल झील के फटने से जोड़ा जा रहा था। हालांकि, नेपाली वैज्ञानिकों की जांच रिपोर्ट ने इन धारणाओं को खारिज कर दिया है। उपग्रह तस्वीरों, मौसम संबंधी आंकड़ों और जल विज्ञान के विश्लेषण से साफ हुआ है कि ऊंचे हिमालयी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हुए हिमस्खलन और चट्टानों के टूटने के कारण नदियों में मलबे का भीषण बहाव पैदा हुआ था।
5,200 मीटर की ऊंचाई से गिरा 0.56 वर्ग किमी ग्लेशियर का हिस्सा
अध्ययन के मुताबिक, बुधवार (26 अगस्त) सुबह करीब 8:37 बजे रसुवा के लांगटांग-लिरुंग क्षेत्र में 5,200 मीटर की ऊंचाई से बर्फ, चट्टानों और मलबे का विशाल हिस्सा टूटना शुरू हुआ। यह मलबा 2,930 मीटर की ऊंचाई पर स्थित ल्हेंदे नदी में जा गिरा। सैटेलाइट इमेज से पता चला है कि इस घटना से करीब 10 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में बड़ा भौगोलिक बदलाव आया और लगभग 0.56 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला ग्लेशियर का हिस्सा टूटकर अलग हो गया।
167 किमी/घंटे की प्रचंड रफ्तार से आगे बढ़ा मलबा
रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि बर्फ और चट्टानों का यह मलबा महज 7 मिनट में 22 किलोमीटर की दूरी तय कर रसुवागढ़ी पहुंच गया। इस दौरान इसकी औसत रफ्तार 167 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई। आगे बेत्रावती की ओर बढ़ते हुए इसकी गति 73 किमी/घंटा और निचले मैदानी इलाकों में 22 किमी/घंटा रह गई। हालांकि, गति कम होने के बाद भी पानी अपने साथ भारी मात्रा में गाद, मिट्टी और विशाल चट्टानें बहाकर ले गया, जिससे भीषण तबाही हुई।
न बादल फटा, न झील फटी: वैज्ञानिकों का तर्क
शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में उस दिन कोई असाधारण भारी बारिश दर्ज नहीं की गई थी, जिससे बादल फटने का दावा खारिज होता है। इसके अलावा, बाढ़ आने से कुछ घंटे पहले रसुवागढ़ी और स्याफ्रुबेसी में नदी का जलस्तर घटने लगा था। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि हिमस्खलन के कारण ऊपर नदी का बहाव कुछ समय के लिए रुक गया था, जिसके अचानक टूटने से नीचे तबाही का सैलाब आ गया।
13 जलविद्युत परियोजनाएं ठप, 3 लाख करोड़ का नुकसान
इस आपदा ने नेपाल के बुनियादी ढांचे को गहरा घाटा पहुंचाया है। नेपाल विद्युत प्राधिकरण के अनुसार, 13 जलविद्युत परियोजनाएं और एक सौर ऊर्जा परियोजना पूरी तरह प्रभावित हुई हैं, जिससे 431 मेगावाट बिजली का उत्पादन ठप हो गया है। सरकार के प्राथमिक आकलन के मुताबिक, इस त्रासदी से देश को करीब 3 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक नुकसान का अनुमान लगाया गया है। 903 मौतों के साथ राहत और बचाव कार्य अभी भी जारी हैं।