रायपुरछत्तीसगढ

दावत-ए-इस्लामी का एक आवेदन अब भी जिंदा : बृजमोहन मोहन अग्रवाल

रायपुर न्यूज़ धमाका /// पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा, पाकिस्तान से जुड़े संगठन दावत-ए-इस्लामी को छत्तीसगढ़ सरकार किसी भी स्थिति में जमीन देने पर तुली हुई है। एक आवेदन नस्तीबद्ध करने की बात की जा रही है, लेकिन एक और आवेदन अभी जिंदा है। इस आवेदन पर बहुत तेजी से काम हो रहा है।

आगे कहा कि दावत-ए- इस्लामी द्वारा सामुदायिक भवन निर्माण हेतु बोरियाखुर्द प.ह.न. 71 में 10 हेक्टेयर भूमि आवंटन की मांग 31 जनवरी 2021 को की गई थी। इसके बाद 22 दिसंबर 2021 को न्यायालय अतिरिक्त तहसीलदार रायपुर द्वारा राजस्व प्रकरण क्रमांक /अ-19(5) वर्ष 2020-21 के तहत अधिसूचना जारी की गई। 13 जनवरी 2022 को आपत्ति पेश करने की अंतिम तिथि थी।

शासन एवं प्रशासन को ऐसी क्या जल्दबाजी थी कि आपत्ति की तिथि के पहले आवेदन निरस्त करना पड़ा। जो आवेदक सालभर जमीन आवंटन की प्रक्रिया पूरी करते रहे, उन्हीं आवेदक ने एक दिन में ही अपना आवेदन क्यों वापस लिया। इससे यह स्पष्ट परिलक्षित है कि शासन प्रशासन षड्यंत्र के तहत पाकिस्तानी संस्था को जमीन आवंटन के लिए लगा हुआ था और जब यह मामला सार्वजनिक हुआ तो आवेदकों को बुलाकर रात्रि में उनसे वापसी का आवेदन लेकर प्रकरण को बेक डेट में निरस्त करने का ढोंग किया गया।

अग्रवाल ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एक ओर जहां दावत-ए-इस्लामी को जमीन देने के उनके 31 जनवरी 2021 के आवेदन के आधार पर जारी अधिसूचना को निरस्त किया गया है। वहीं एक आवेदन 28 दिसंबर 2021 को माशा एजुकेशन एंड सोशल वेलफेयर सोसाइटी के संचालक मोहम्मद अनवारुत हसन ने अनुविभागीय दंडाधिकारी रायपुर को किया, जिसके नोट में मठपुरैना कब्रिस्तान के बाजू में दावत-ए-इस्लामी को खसरा नं. 199/1 का भाग आवंटित करने की भी मांग की गई है।

28 दिसंबर 2021 को ही आवेदन को प्रदेश के परिवहन आवास एवं पर्यावरण वन मंत्री ने एसडीएम रायपुर को अनुशंसित किया। 29 दिसंबर को ही पत्र डिस्पैच होकर एसडीएम से होते एडिशनल तहसीलदार तक पहुंच गया। 29 दिसंबर को एडिशनल तहसीलदार ने प्रकरण दर्ज कर इश्तहार प्रकाशन के लिए भी अनुशंसा कर दी।

अग्रवाल ने कहा, पाकिस्तानी आतंकी संस्था के लिए जमीन आंबटन की इतनी तत्परता क्यों? किसके कहने पर? और किसलिए? प्रदेश में ढाई-ढाई साल से हजारों की संख्या में जमीन आवंटन के आवेदन जहां हैं वहीं पड़े हुए हैं। फिर इस अकेले प्रकरण में इतनी तत्परता क्यों दिखाई गई? यह आवेदन तो शासन द्वारा निरस्त किए गए दावत-ए-इस्लामी के आवेदन से अलग है। इस पर प्रशासन मौन क्यों हैं। आखिर मासा एजुकेशन एंड सोशल वेलफेयर सोसाइटी दावत-ए-इस्लामी के लिए जमीन क्यों मांग रही है? सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए और यह भी बताना चाहिए की इस आवेदन का क्या हुआ?

Chhattisgarh News Dhamaka Team

अमन चीफ एडिटर - छत्तीसगढ़ न्यूज़ धमाका // प्रदेश उपाध्यक्ष, छग जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन छत्तीसगढ // ; हरिभूमि ब्यूरो चीफ जिला कोंडागांव // 18 सालो से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। विश्वसनीय, सृजनात्मक व सकारात्मक पत्रकारिता में विशेष रूचि। कृषि, वन, शिक्षा; जन जागरूकता के क्षेत्र की खबरों को हमेशा प्राथमिकता। जनहित के समाचारों के लिये तत्परता व् समर्पण// जरूरतमंद अनजाने की भी मदद कर देना पहली प्राथमिकता

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