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छत्तीसगढ़ में लिंग परीक्षण और भ्रूण हत्या पर, स्टेट की टीम प्रत्येक जिलों में जाकर केंद्रों में 772 जांच करेगी

रायपुर न्यूज़ धमाका // प्रदेश में पुरुषों की तुलना में गिर रही महिलाओं के अनुपात पर राज्य सरकार चिंतित है। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने लिंग परीक्षण के खिलाफ अभियान चलाते हुए प्रदेश के प्राइवेट अस्पताल, नर्सिंग होम व सोनोग्राफी सेंटरों समेत 772 केंद्रों में जांच अभियान शुरू कर दिया है।

पहले दिन स्टेट टीम ने पूर्व गर्भाधान और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम-1994 (पीसीपीएनडीटी एक्ट) के तहत महासमुंद तुमगांव के साईं नमन नर्सिंग होम को सीलबंद कर दिया है।

पीसीपीएनडीटी के राज्य समुचित प्राधिकारी द्वारा प्राधिकृत अधिकारी डा. अनिल परसाई, सलाहकार डा. वर्षा राजपूत ने बताया कि नर्सिंग होम में दो साल के दस्तावेज खंगाले गए। इसमें अनिमितता थीं। उन्होंने बताया कि प्रत्येक अस्पताल, नर्सिंग होम व जांच केंद्रों में अल्ट्रासाउंड या अल्ट्रासोनोग्राफी व अन्य जांच के पिछले दो सालों के रिकार्ड रखना जरूरी है। यदि रिकार्ड में अनियमितता होगी, तो कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि अब तक इस तरह से तीन मामलों पर कार्रवाई की गई है। इसके बाद राज्य की टीम बिलासपुर जिले में जांच करेगी।

पुरुषों के अनुपात में महिलाएं हो रहीं कम

बता दें कि छत्तीसगढ़ में 2011 की स्थिति में लिंगानुपात औसत दर से 30 अंक नीचे गिर गया है। जहां वर्ष 2011 में सर्वे के दौरान प्रति 1000 पुरुषों में 960 महिलाएं थीं। वहीं वर्तमान में प्रति 1000 पुरुषों में 928 महिलाएं हो गई हंै। स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि इसके पीछे कहीं ना कहीं लिंग परीक्षण और भ्रूण हत्या जैसे मामले हो सकते हैं। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग 28 जिलों में जांच अभियान शुरू कर दी है।

हर तीन माह में जांच का नियम दरकिनार

विभाग के मुताबिक लिंग परीक्षण और भ्रूण हत्या के विरुद्ध पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत प्रत्येक तीन महीने में प्राइवेट अस्पताल, नर्सिंग होम व सोनोग्राफी सेंटरों का निरीक्षण करना है। इस दौरान उनके दस्तावेजों की जांच व रिकार्ड भी रखे जाने हैं। इसमें अनियमिता की स्थिति में तुंरत कार्रवाई व लाइसेंस निरस्त कर संस्था सील करने का नियम है। लेकिन जिला स्तर पर यह कार्रवाई न होने से इस तरह के मामले बढ़ रहे हैं।

यह है पीसीपीएनडीटी एक्ट

पीसीपीएनडीटी एक्ट में जन्म से पूर्व शिशु के लिंग की जांच पर पाबंदी है। ऐसे में अल्ट्रासाउंड या अल्ट्रासोनोग्राफी कराने वाले या करने वाले डाक्टर, लैब कर्मी को तीन से पांच साल सजा और 10 से 50 हजार जुर्माने की सजा का प्राविधान है।

शुरू किया गया है अभियान

लिंग परीक्षण व भ्रुण हत्या के विरुद्ध राज्य स्तरीय अभियान की शुुरुआत की गई है। स्टेट की टीम प्रत्येक जिलों में जाकर केंद्रों में जांच करेगी। किसी भी तरह की अनियमिता पाए जाने पर कार्रवाई करेंगे। जिला स्तर पर भी यह जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

Chhattisgarh News Dhamaka Team

अमन चीफ एडिटर - छत्तीसगढ़ न्यूज़ धमाका // प्रदेश उपाध्यक्ष, छग जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन छत्तीसगढ // ; हरिभूमि ब्यूरो चीफ जिला कोंडागांव // 18 सालो से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। विश्वसनीय, सृजनात्मक व सकारात्मक पत्रकारिता में विशेष रूचि। कृषि, वन, शिक्षा; जन जागरूकता के क्षेत्र की खबरों को हमेशा प्राथमिकता। जनहित के समाचारों के लिये तत्परता व् समर्पण// जरूरतमंद अनजाने की भी मदद कर देना पहली प्राथमिकता

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