
बालोद न्यूज धमाका – बालोद ज़िले के गुंडरदेही ब्लॉक अंतर्गत बीजाभाठा गांव में ग्रामीणों ने एक स्कूल शिक्षिका को हटाने की मांग को लेकर रविवार को राजनांदगांव-गुंडरदेही मुख्य मार्ग (नेशनल हाईवे) पर चक्काजाम किया। लगातार बारिश के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने घंटों सड़क को अवरुद्ध रखा। इस आंदोलन में स्थानीय कांग्रेस विधायक कुंवर सिंह निषाद भी शामिल हुए और प्रदर्शनकारियों के साथ धरने पर बैठे।
क्या है मामला?
प्रदर्शनकारी ग्रामीणों का आरोप है कि प्राथमिक शाला बीजाभाठा में पदस्थ शिक्षिका उषा बोरकर की कार्यप्रणाली ठीक नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि:
- शिक्षिका का व्यवहार विद्यार्थियों और ग्रामीणों के प्रति अपमानजनक है,
- बच्चों की पढ़ाई पर नकारात्मक असर पड़ रहा है,
- पूर्व में कई बार स्थानीय स्तर पर शिकायत दी जा चुकी है, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
नारेबाजी और मांग
गांववासियों ने “शिक्षा विभाग मुर्दाबाद”, “उषा बोरकर को हटाओ, स्कूल को बचाओ” जैसे नारों के साथ प्रशासन और विभाग के खिलाफ आक्रोश जताया। आंदोलनकारी तत्काल शिक्षिका को स्थानांतरित करने की लिखित आदेश की मांग कर रहे थे।
विधायक निषाद का समर्थन
कांग्रेस विधायक कुंवर सिंह निषाद भी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों का समर्थन करते हुए कहा:
“ग्रामीणों की मांग जायज़ है। अगर शिक्षिका के व्यवहार से बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है, तो यह चिंता का विषय है। प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।”
प्रशासन की स्थिति और समाधान प्रयास
- मौके पर स्थानीय पुलिस बल और तहसीलदार पहुंचे,
- चक्काजाम हटाने के लिए ग्रामीणों से बातचीत की गई,
- प्रशासन ने जांच कर कार्रवाई का भरोसा दिलाया, जिसके बाद धीरे-धीरे यातायात सामान्य हुआ।
प्रभाव और प्रतिक्रिया
इस चक्काजाम के कारण:
- नेशनल हाईवे पर घंटों ट्रैफिक जाम रहा,
- स्कूली बसें और एंबुलेंस जैसे आवश्यक वाहन फंसे रहे,
- सामाजिक संगठनों ने भी मामले को लेकर प्रशासन से पारदर्शिता और शीघ्र निर्णय की मांग की।
आगे क्या?
तहसील कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, मामले की प्राथमिक जांच टीम बनाई जा रही है। यदि शिक्षिका के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है, तो विभाग स्थानांतरण अथवा अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार कर सकता है।
निष्कर्ष
बीजाभाठा का यह मामला ग्रामीण शिक्षा तंत्र में विश्वास और पारदर्शिता की ज़रूरत को रेखांकित करता है। किसी भी शिक्षण संस्था में शिक्षक का व्यवहार केवल शिक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक संबंधों और विश्वास का प्रतीक होता है। ऐसे में शिकायतों की निष्पक्ष जाँच और समयबद्ध निवारण अनिवार्य है।