
रायपुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित DMF घोटाले में आरोपी निलंबित IAS अधिकारी रानू साहू और पूर्व मुख्यमंत्री की उप सचिव सौम्या चौरसिया को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने शर्तों के साथ दोनों को अंतरिम जमानत प्रदान की है।
छत्तीसगढ़ में नहीं रह सकेंगी दोनों अफसर
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि जांच को प्रभावित करने की आशंका के चलते रानू साहू और सौम्या चौरसिया को छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर रहना होगा। अंतरिम जमानत आगामी आदेश तक प्रभावी रहेगी। वहीं, इसी मामले के एक और आरोपी सूर्यकांत तिवारी की याचिका पर सुनवाई अब जुलाई में होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने उठाए जांच पर सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच एजेंसियों से पूछा कि जांच में इतनी देरी क्यों हो रही है। अभियोजन पक्ष ने बताया कि गवाहों द्वारा नोटिस का अनुपालन नहीं किया जा रहा, जिससे जांच बाधित हो रही है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि “गवाहों में भरोसा पैदा करना जांच एजेंसी की ज़िम्मेदारी है।”
जमानत पर दोहरा मुकदमा ना हो – कोर्ट की सख्ती
कोर्ट ने यह भी कहा कि एक ही मामले में अगर आरोपी को जमानत दी जाती है तो जांच एजेंसियों द्वारा दूसरे मामले में तुरंत हिरासत में लेना अनुचित है। इसीलिए जमानत के साथ कठोर शर्तें लगाई गईं, जिसमें राज्य में निवास प्रतिबंधित किया गया।
क्या है DMF घोटाला?
डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) एक ट्रस्ट है, जिसे खनन प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के कल्याण के लिए बनाया गया है। लेकिन छत्तीसगढ़ में DMF से जुड़े करोड़ों रुपए के घोटाले का खुलासा हुआ है।
घोटाले की मुख्य बातें:
- 25% से 40% तक कमीशन की व्यवस्था उजागर।
- ठेकेदारों को अवैध रूप से टेंडर आवंटित किया गया।
- नकद लेन-देन, फर्जी फर्मों, और फर्जी दस्तावेजों का प्रयोग।
- 76.50 लाख रुपये नकद, 8 बैंक खाते सीज, और डिजिटल उपकरण जब्त।
- ईडी (ED) और राज्य आर्थिक अपराध शाखा (EOW/ACB) दोनों इस मामले की जांच कर रही हैं।
ED की रिपोर्ट के मुताबिक:
- रानू साहू के रायगढ़ और कोरबा जिलों में कलेक्टर रहते हुए, भारी अनियमितताएं की गईं।
- सौम्या चौरसिया पर भी आरोप है कि उन्होंने ठेकेदारों से रिश्वत लेकर कामों की मंजूरी दी।
- राजनीतिक संरक्षण और अफसरों की मिलीभगत से सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान पहुंचाया गया।
अब क्या आगे?
- कोर्ट के आदेश के मुताबिक, रानू साहू और सौम्या चौरसिया को छत्तीसगढ़ में नहीं रहना होगा।
- वे जमानत की अन्य शर्तों का पालन करते हुए देश के अन्य किसी हिस्से में निवास कर सकती हैं।
- मामले की अगली सुनवाई तक निगरानी जारी रहेगी।



