रायपुर न्यूज़ धमाका /// शहर के अलग-अलग इलाकों में इस तरह के 10 हजार आवासीय फ्लैट बनकर तैयार हैं। गरीबों को नजूल की जमीन पर राज्य शासन द्वारा पट्टा बांटने की घोषणा के बाद पट्टे की बाट जोह रहे जरूरतमंद परिवार अपनी पुरानी जगह छोड़कर नगर निगम द्वारा बनाए गए ईडब्लूएस आवास में जाने से आनाकानी कर रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत रायपुर शहर के अलग-अलग इलाकों में इस तरह के 10 हजार आवासीय फ्लैट बनकर तैयार हैं, पर मुख्यालय द्वारा आवंटन के बाद भी 9800 घर खाली पड़े हैं
प्रदेश की कांग्रेस सरकार द्वारा गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले चिन्हांकित परिवार को नजूल जमीन का पट्टा बांटने चुनाव के समय घोषणा की गई। इसके बाद निगम स्तर पर इसके लिए शहरभर में सर्वे किया गया। तुंहर सरकार तुंहर द्वार शिविर के दौरान शहर के 70 वार्डों में जनप्रतिनिधियों के बीच जाकर जल्द पट्टा वितरण का वादा कर चले आए, पर आज तक चिन्हांकित परिवारों को शासन की ओर से निशुल्क पट्टा वितरण नहीं हो पाया है।
इन्हें है प्राथमिकता
सड़क चौड़ीकरण के दौरान प्रभावित परिवार ,तालाब सौंदर्यीकरण प्रोजेक्ट में हटाई जाने वाली झुग्गी बस्ती के प्रभावित जन, केंद्र अथवा राज्य शासन के किसी प्रोजेक्ट के दायरे में आने वाली स्लम बस्ती, या नजूल की जमीन पर रह रहे लोग।
मआईसी से जुड़े अधिकारियों ने बताया, ईडब्लूएस के खाली पड़े आवास को कमजोर व गरीब वर्ग के ऐसे पात्र हितग्राही, जिनका खुद का कोई घर न हो और किराए के मकान में रहता हो, उसे नियम के तहत सबके लिए आवास योजना में शामिल करते हुए किफायती दर पर आवास उपलब्ध कराने रायपुर नगर निगम की एमआईसी से प्रस्ताव पारित हो चुका है। 4 लाख 75 हजार की लागत वाले ईडब्लूएस आवास में हितग्राही को डेढ़ लाख की सब्सिडी केंद्रांश के रूप में मिलेगी, जबकि किराएदार होने की वजह से उसे राज्यांश के रूप में अनुदान नहीं मिलेगा। कुल मिलाकर 3 लाख 25 हजार में किराएदार को मकान देने का प्रस्ताव है।

