छतीसगढ़दुर्ग

तीन महीने से नहीं मिला वेतन, मजदूरों का फूटा गुस्सा: अर्धनग्न होकर किया प्रदर्शन, कंपनी ने दिया आश्वासन

दुर्ग न्यूज़ धमाका – छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में श्रमिकों का धैर्य आखिरकार जवाब दे गया। नगपुरा क्षेत्र स्थित ‘स्ट्रक राइट मेटल बिल्डिंग सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड’ कंपनी में काम करने वाले सैकड़ों मजदूरों ने तीन माह से वेतन न मिलने और सुरक्षा उपकरणों की अनुपलब्धता के खिलाफ अर्धनग्न होकर जोरदार प्रदर्शन किया।


क्या है मामला?

यह कंपनी बोरई रोड पर नगपुरा शनि मंदिर के पास स्थित है, जहां ब्रिज निर्माण के लिए स्ट्रक्चर तैयार किए जाते हैं। प्रदर्शनकारी मजदूरों का आरोप है कि:

  • उन्हें तीन महीने से वेतन नहीं मिला है।
  • बिना सेफ्टी शूज, हेलमेट और अन्य सुरक्षा उपकरणों के ही खतरनाक काम कराया जा रहा है।
  • किसी प्रकार की चोट लगने पर प्राथमिक उपचार तक नहीं मिलता, मजदूर हल्दी लगाकर काम करने को मजबूर हैं।
  • प्रबंधन का व्यवहार बेहद अभद्र और अपमानजनक है, आए दिन गाली-गलौज की जाती है।

प्रदर्शन के दौरान अर्धनग्न होकर जताया विरोध

वेतन और सुरक्षा सुविधाओं की मांग को लेकर मजदूरों ने कंपनी गेट के बाहर अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया, जिससे स्थानीय प्रशासन और लोगों का ध्यान इस गंभीर मुद्दे की ओर गया। उनका कहना था कि वे भूखे पेट काम नहीं कर सकते और अब चुप रहना संभव नहीं है।


कंपनी प्रबंधन ने मांगा समय, मजदूरों ने रोका प्रदर्शन

लगातार बढ़ते आक्रोश और मीडिया की मौजूदगी के बीच आखिरकार कंपनी प्रबंधन सामने आया। मजदूरों को आश्वासन दिया गया कि:

  • दो माह के भीतर तीन माह का बकाया वेतन भुगतान कर दिया जाएगा।
  • सेफ्टी इक्विपमेंट्स जल्द ही उपलब्ध कराए जाएंगे।
  • श्रमिकों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा।

आश्वासन के बाद फिलहाल मजदूरों ने प्रदर्शन समाप्त कर दिया है, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि तय समय में वेतन नहीं मिला और स्थिति नहीं सुधरी तो बड़े आंदोलन की तैयारी की जाएगी।


किसके नाम पर है कंपनी?

प्रदर्शनकारी मजदूरों ने दावा किया है कि यह कंपनी राजेश कुमार जैन और मोहम्मद कामदार के नाम पर पंजीकृत है। श्रमिकों ने जिला प्रशासन से कंपनी के संचालन और मजदूरों के हितों की जांच की मांग की है।


प्रशासन पर सवाल

यह मामला छत्तीसगढ़ में श्रमिक अधिकारों और औद्योगिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। तीन महीने तक वेतन न देना, सुरक्षा उपकरण न उपलब्ध कराना और बदसलूकी जैसे आरोप न केवल श्रम कानूनों का उल्लंघन हैं, बल्कि मानवाधिकार हनन की श्रेणी में भी आते हैं।


निष्कर्ष:

हालांकि कंपनी ने अस्थायी तौर पर संकट को टाल दिया है, लेकिन यह प्रकरण छत्तीसगढ़ में औद्योगिक कामगारों की दुर्दशा को उजागर करता है। अब सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या कंपनी अपना वादा निभाएगी या फिर मजदूरों का संघर्ष दोबारा शुरू होगा।

Chhattisgarh News Dhamaka Team

अमन चीफ एडिटर - छत्तीसगढ़ न्यूज़ धमाका // प्रदेश उपाध्यक्ष, छग जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन छत्तीसगढ // ; हरिभूमि ब्यूरो चीफ जिला कोंडागांव // 18 सालो से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। विश्वसनीय, सृजनात्मक व सकारात्मक पत्रकारिता में विशेष रूचि। कृषि, वन, शिक्षा; जन जागरूकता के क्षेत्र की खबरों को हमेशा प्राथमिकता। जनहित के समाचारों के लिये तत्परता व् समर्पण// जरूरतमंद अनजाने की भी मदद कर देना पहली प्राथमिकता

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