
बिलासपुर न्यूज धमाका – प्रदेश की सड़कों को मावे से मुक्त करने वाली याचिका पर हुई सुनवाई में शासन ने अपना पक्ष रखते हुए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी। इसके साथ ही प्रदेश की सड़कों को मवेशी मुक्त करने हेतु कड़ाई से प्रस्तावित कार्य योजना के पालन करने के निर्देश के साथ एक एसओपी जारी करने दिसंबर के पहले सप्ताह का समय मांगा हाईकोर्ट ने शासन को समय देते हुए अगली सुनवाई 16 दिसंबर 2024 को तय की है।
छत्तीसगढ़ में नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे को मवेशी मुक्त करने वाली याचिका पर आज सोमवार को सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायाधीश अमितेंद्र किशोर प्रसाद की युगलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रदेश सरकार का पक्ष रखने वाले उपमहाधिवक्ता यशवंत सिंह ठाकुर ने राज्य शासन द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा अभिमत और प्रस्तावित कार्ययोजना को लेकर एक विशेष समिति बनाई गई है।
वहीं प्रदेश में कड़ाई से पालन करने के निर्देश के साथ एक एसओपी जारी करने दिसंबर के पहले सप्ताह का समय मांगे जाने पर कोर्ट में स्वीकार किया। कोर्ट ने कहा देश के अन्य राज्यों के इस विषय पर बनाएं रोडमेप को ये कैसे प्रयोग करते हैं देखना होगा…? वहीं इस इस मामले में मुख्य सचिव राज्य शासन को हलफनामा दायर करने कहा है। वहीं देश के अन्य राज्यों में मवेशी मुक्त करने बनाई गई नीति और प्रपोजल को अपनाए जाने संबंधी रिपोर्ट को पेश करने कहा है। वहीं अगली सुनवाई 16 दिसंबर 2024 को सुनिश्चित की गई है।
दरअसल बिलासपुर सहित प्रदेश की सड़कों में मवेशियों का जमावड़ा रहता है, जिससे लगातार दुर्घटनाओं के मामले भी सामने आते हैं इन सब मामलों को लेकर के छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जनहित याचिका की सुनवाई चल रही है। पिछली सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की बेंच ने संबंधित विभागों को सड़क पर बैठे मवेशियों को लेकर और दुर्घटना सहित सटीक रोड मैप नहीं बनाए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। बैंच ने नाराजगी जाहिर करते हुए शासन से कहा था “8 हफ्ते नहीं 8 साल ले लें लेकिन मवेशी सड़क पर दिखना नहीं चाहिए”।



