
बीजापुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के कर्रेगुट्टा पहाड़ पर अब तक के सबसे बड़े माओवादी विरोधी ऑपरेशन की सफलता के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज गलगम पहुंचे। यहां उन्होंने सीआरपीएफ और छत्तीसगढ़ पुलिस के जवानों के साथ संवाद किया, उन्हें बधाई दी और हौसला अफजाई की।
कर्रेगुट्टा क्षेत्र को माओवादियों की अभेद्य शरणस्थली माना जाता था, जहां पहाड़ी बंकरों में माओवादी शीर्ष नेता चिकित्सा सहित तमाम सुविधाओं का लाभ ले रहे थे। सुरक्षा बलों ने यहां 31 से अधिक इनामी नक्सलियों को मार गिराया और क्षेत्र को नक्सलियों से मुक्त करा लिया।
भारत माता की जय से गूंजा गलगम
मुख्यमंत्री जैसे ही हेलिकॉप्टर से गलगम पहुंचे, जवानों ने ‘भारत माता की जय’ के नारों से उनका स्वागत किया। मुख्य सचिव अमिताभ जैन और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह भी उनके साथ थे। पूरे कैंप का माहौल देशभक्ति और उत्साह से सराबोर रहा।
सीएम ने कहा – ये केवल जीत नहीं, नया संदेश है
मुख्यमंत्री साय ने जवानों और अफसरों से बातचीत करते हुए कहा:
“आपका साहस, समर्पण और देशप्रेम इस राज्य की शान है। यह सिर्फ ऑपरेशन की सफलता नहीं है, बल्कि माओवादियों को दिया गया स्पष्ट संदेश है – अब राज्य में केवल विकास और कानून का राज चलेगा।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आने वाले समय में माओवाद के खिलाफ अभियान और तेज किया जाएगा।
अभियान की हर बात जवानों ने साझा की
सीआरपीएफ और पुलिस के जवानों ने कर्रेगुट्टा ऑपरेशन की एक-एक रणनीति, चुनौतियाँ और अनुभव मुख्यमंत्री से साझा किए। सीएम ने सभी को गंभीरता से सुना और उनकी कर्तव्य परायणता और अदम्य साहस की सराहना की।
कर्रेगुट्टा ऑपरेशन: एक नजर में
- स्थान: बीजापुर, कर्रेगुट्टा पहाड़
- मारे गए माओवादी: 31+ इनामी नक्सली
- बंकर: अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस माओवादी अड्डा
- सुरक्षा बलों की भूमिका: CRPF और छत्तीसगढ़ पुलिस का संयुक्त अभियान
संदेश स्पष्ट है: माओवाद अब नहीं टिकेगा
कर्रेगुट्टा ऑपरेशन छत्तीसगढ़ में माओवाद के खिलाफ एक टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। यह दिखाता है कि सरकार अब सीधे टकराव और निर्णायक कार्रवाई की राह पर है – न केवल हथियारों से, बल्कि जन समर्थन और विकास के रास्ते से भी।



