
25 जुलाई 2026 //
राजिम न्यूज़ धमाका – ग्राम जौंदी की किसान परिवार से आने वाली रोली साहू ने एलएलबी में 72.11% अंक हासिल करने के साथ ऑल इंडिया बार परीक्षा भी पास कर अधिवक्ता बनने का सपना साकार किया है।
यह कहानी सिर्फ एक छात्रा की सफलता की नहीं, बल्कि उस जज्बे की है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का हौसला देता है। नवापारा से लगे ग्राम जौंदी की बेटी रोली साहू ने अपनी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के बल पर अधिवक्ता बनकर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। किसान टीकमचंद साहू की पुत्री रोली ने एलएलबी परीक्षा में 72.11 प्रतिशत अंक हासिल करने के साथ ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (AIBE) भी सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर वकालत के पेशे में कदम रखा है। उनकी इस उपलब्धि से गांव, साहू समाज और पूरे क्षेत्र में गर्व और खुशी का माहौल है।

गांव की पगडंडी से अदालत तक का सफर
ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ी रोली साहू ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही पूरी की। संसाधनों की कमी और ग्रामीण चुनौतियों के बावजूद उन्होंने कभी अपने सपनों को छोटा नहीं होने दिया। उच्च शिक्षा के लिए रायपुर का रुख किया और पूरी मेहनत के साथ कानून की पढ़ाई पूरी की। लगातार अध्ययन और कठिन परिश्रम का ही परिणाम है कि उन्होंने एलएलबी में उत्कृष्ट अंक प्राप्त किए और बार परीक्षा पास कर अधिवक्ता बनने का गौरव हासिल किया।
आईएएस बनने का सपना, कानून से मिला नया लक्ष्य
रोली बताती हैं कि उनका बचपन का सपना भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाकर आईएएस या आईपीएस अधिकारी बनने का था। लेकिन समय के साथ उनकी रुचि कानून के क्षेत्र की ओर बढ़ी। उन्होंने महसूस किया कि न्याय व्यवस्था के माध्यम से भी समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। इसी सोच के साथ उन्होंने एलएलबी की पढ़ाई पूरी की और आज अधिवक्ता के रूप में अपने करियर की नई शुरुआत की है। रोली का कहना है कि अधिवक्ता बनना उनकी अंतिम मंजिल नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। भविष्य में वे उच्च शिक्षा प्राप्त कर समाज के गरीब, जरूरतमंद और न्याय से वंचित लोगों की मदद करना चाहती हैं।
माता-पिता का सपना हुआ साकार
बेटी की सफलता से किसान पिता टीकमचंद साहू और परिवार के अन्य सदस्य बेहद भावुक हैं। पिता का कहना है कि बेटी ने पूरे परिवार का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। उन्होंने कहा कि यदि बेटियों को भी बेटों की तरह शिक्षा और अवसर दिए जाएं तो वे हर क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना सकती हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि बेटियों की शिक्षा में कभी समझौता नहीं करना चाहिए, क्योंकि शिक्षित बेटी केवल अपने परिवार ही नहीं, पूरे समाज का भविष्य बदल सकती है।

गांव में खुशी का माहौल, मिल रही बधाइयां
रोली साहू की सफलता के बाद ग्राम जौंदी में उत्सव जैसा माहौल है। ग्रामीण, रिश्तेदार, मित्र, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और साहू समाज के लोग लगातार उनके घर पहुंचकर बधाई दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि रोली ने यह साबित कर दिया कि प्रतिभा शहरों की मोहताज नहीं होती। यदि मेहनत और संकल्प मजबूत हो तो गांव की बेटियां भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं।

बेटियों के लिए बनी प्रेरणा
आज भी कानून के क्षेत्र में महिलाओं की संख्या अपेक्षाकृत कम मानी जाती है, लेकिन रोली साहू जैसी युवा बेटियां इस सोच को बदल रही हैं। उनकी सफलता उन हजारों ग्रामीण छात्राओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देख रही हैं। रोली की उपलब्धि यह संदेश देती है कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत ईमानदार हो और आत्मविश्वास मजबूत हो, तो सफलता निश्चित है। गांव की इस होनहार बेटी ने यह साबित कर दिया है कि सपनों की कोई सीमा नहीं होती, उन्हें पूरा करने का साहस होना चाहिए।
रोली की सफलता परिवार और समाज के लिए गर्व का विषय
उनकी यह सफलता न केवल परिवार और समाज के लिए गर्व का विषय है, बल्कि ग्रामीण अंचलों की बेटियों के लिए उम्मीद और आत्मविश्वास की नई मिसाल भी बन गई है। आने वाले समय में रोली साहू निश्चित रूप से न्याय के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के साथ-साथ समाज सेवा का भी मजबूत उदाहरण पेश करेंगी।



