
25 जुलाई 2026 //
दिल्ली न्यूज़ धमाका – दिल्ली हाई कोर्ट ने वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) कार्य के लिए स्कूल शिक्षकों की तैनाती को लेकर चुनाव आयोग (ECI) से कड़े सवाल पूछे हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि आखिर प्रदेश के शिक्षकों को इस काम में क्यों लगाया गया, जबकि उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी छात्रों को पढ़ाना है। चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने चुनाव आयोग से पूछा कि क्या वह संविधान के अनुच्छेद 324 का हवाला देकर अपनी मर्जी से कोई भी निर्णय ले सकता है। अदालत ने संकेत दिया कि आयोग की शक्तियां असीमित नहीं हैं और उनका इस्तेमाल संविधान तथा कानून के दायरे में ही होना चाहिए।
सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग (ECI) से कई तीखे सवाल पूछे। अदालत ने कहा, “क्या आप अनुच्छेद 324 की आड़ में जो चाहें, वह कर सकते हैं?” खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि मामला शिक्षकों को दिए जाने वाले मानदेय या मुआवजे का नहीं, बल्कि उनके अधिकारों और वैधानिक जिम्मेदारियों का है। कोर्ट ने कहा कि केवल मुआवजा देने का तर्क पर्याप्त नहीं हो सकता। अदालत ने सवाल किया, “क्या आपके जारी किए गए निर्देशों को अनिवार्य माना जा सकता है? क्या आप सिर्फ यह कह सकते हैं कि ‘हम मुआवजा दे रहे हैं, इसलिए ड्यूटी पर आ जाइए’ और उनकी छुट्टियां प्रभावित कर दें? क्या शिक्षकों को आराम की जरूरत नहीं है?” हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग से यह भी पूछा कि वह किस कानूनी अधिकार के तहत स्कूल शिक्षकों को स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के कार्य में तैनात कर रहा है।
चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय वशिष्ठ ने दलील दी कि राजधानी में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि वोटर सूची के विशेष पुनरीक्षण के लिए सभी शिक्षकों को नहीं, बल्कि केवल 10 से 14 प्रतिशत स्कूल शिक्षकों को ही इस कार्य में लगाया गया था। वशिष्ठ ने अदालत को बताया कि चुनाव आयोग को ‘रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट’ की धारा 13B(2) के तहत कर्मचारियों की सेवाएं चुनाव संबंधी कार्यों के लिए लेने का अधिकार प्राप्त है। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया को सुचारु और निष्पक्ष तरीके से पूरा करने तथा किसी प्रकार की प्रशासनिक बाधा से बचने के लिए इस वैधानिक शक्ति का उपयोग किया जाता है।

शिक्षकों को छुट्टी का अधिकार क्यों नहीं?
सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि शिक्षकों से स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) का कार्य केवल छुट्टियों और गैर-शिक्षण घंटों के दौरान कराया जाता है। इस पर दिल्ली हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए सवाल किया कि शिक्षकों को अन्य सरकारी कर्मचारियों की तरह छुट्टियों का अधिकार क्यों नहीं मिलना चाहिए और उन्हें अवकाश के दौरान बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के रूप में काम करने के लिए क्यों कहा जा रहा है।
खंडपीठ ने कहा कि शिक्षकों की छुट्टियों और उनके कार्य-अधिकारों से जुड़े पहलुओं पर भी गंभीरता से विचार किए जाने की आवश्यकता है। अदालत ने चुनाव आयोग से इस मुद्दे पर अपना विस्तृत पक्ष स्पष्ट करने को कहा। सुनवाई के अंत में दिल्ली हाई कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को अपना पक्ष रखते हुए हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई के लिए निर्धारित कर दी।

क्या है संविधान का अनुच्छेद 324
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 324 (Article 324) देश में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना तथा उसकी शक्तियों और जिम्मेदारियों का प्रावधान करता है। इस अनुच्छेद के तहत निर्वाचन आयोग को लोकसभा, राज्य विधानसभाओं, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों के अधीक्षण निर्देशन और नियंत्रण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। चुनाव कार्यक्रम तय करने, मतदान प्रक्रिया का संचालन, मतदाता सूची से जुड़े कार्यों की निगरानी और चुनाव निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने की जिम्मेदारी भी आयोग के पास होती है। हालांकि, अनुच्छेद 324 के तहत मिली शक्तियां असीमित नहीं हैं। चुनाव आयोग को अपने अधिकारों का इस्तेमाल संविधान, लागू कानूनों और न्यायालयों के निर्देशों के अनुरूप करना होता है।



