
28 जुलाई 2026 //
दिल्ली न्यूज़ धमाका – दिल्ली सरकार ने कांवड़ यात्रा-2026 को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की है कि कांवड़ समितियों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता में उल्लेखनीय वृद्धि की जाएगी, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर साल कांवड़ यात्रा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। वहीं महंगाई और कांवड़ शिविरों के संचालन पर आने वाला खर्च भी पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है। ऐसे में सरकार ने कांवड़ समितियों की वित्तीय सहायता बढ़ाने का निर्णय लिया है।
दिल्ली सरकार ने कांवड़ यात्रा-2026 को लेकर कांवड़ समितियों के लिए आर्थिक सहायता में बड़ी बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या, महंगाई और शिविरों के संचालन पर बढ़ते खर्च को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है, जिससे कांवड़ समितियां बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर सकेंगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि सबसे बड़ा बदलाव बड़े कांवड़ शिविरों के लिए किया गया है। अब 20,000 वर्गफुट से अधिक क्षेत्र में 6 से 12 दिन तक संचालित होने वाले कांवड़ शिविरों को मिलने वाली सहायता राशि ₹11 लाख से बढ़ाकर ₹15 लाख कर दी जाएगी। वहीं, 20,000 वर्गफुट से अधिक क्षेत्र में 3 से 5 दिन तक संचालित होने वाले शिविरों के लिए सहायता ₹6 लाख से बढ़ाकर ₹9 लाख कर दी गई है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि 20,000 वर्गफुट से अधिक क्षेत्र में 6 से 12 दिन तक संचालित होने वाले बड़े कांवड़ शिविरों के लिए अनुदान राशि ₹11 लाख से बढ़ाकर ₹15 लाख कर दी गई है। वहीं, इसी श्रेणी के 3 से 5 दिन तक चलने वाले शिविरों को अब ₹6 लाख की जगह ₹9 लाख की सहायता मिलेगी। इसके अलावा अन्य सभी श्रेणियों के शिविरों की सहायता राशि में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। 15,001 से 20,000 वर्गफुट क्षेत्र वाले शिविरों के लिए 3 से 5 दिन की अवधि में अनुदान ₹4 लाख से बढ़ाकर ₹8 लाख और 6 से 12 दिन की अवधि में ₹7 लाख से बढ़ाकर ₹9 लाख किया जाएगा।
10,001 से 15,000 वर्गफुट क्षेत्र वाले शिविरों को 3 से 5 दिन के लिए ₹4 लाख के बजाय ₹6 लाख और 6 से 12 दिन के लिए ₹7 लाख के बजाय ₹8 लाख की सहायता मिलेगी। इसी प्रकार, 5,001 से 10,000 वर्गफुट क्षेत्र वाले शिविरों के लिए अनुदान ₹2.50 लाख से बढ़ाकर ₹3 लाख तथा लंबी अवधि के शिविरों के लिए ₹4 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख किया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि 5,000 वर्गफुट तक के छोटे कांवड़ शिविरों को भी राहत दी गई है। ऐसे शिविरों के लिए 3 से 5 दिन की अवधि में सहायता राशि ₹1.50 लाख से बढ़ाकर ₹2 लाख और 6 से 12 दिन की अवधि में ₹2 लाख से बढ़ाकर ₹3 लाख कर दी गई है।
श्रद्धालुओं को बेहतर व्यवस्थाएं देने पर सरकार का जोर
रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में कांवड़ यात्रा का स्वरूप लगातार बड़ा होता जा रहा है। वर्ष 2024 में राजधानी में 170 कांवड़ शिविर लगाए गए थे, जबकि वर्ष 2025 में इनकी संख्या बढ़कर 308 हो गई। उन्होंने कहा कि इसी बढ़ती आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कांवड़ समितियों को अधिक आर्थिक सहयोग देने का फैसला किया है, ताकि श्रद्धालुओं की सेवा में कोई कमी न रहे। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि पहले की तरह कांवड़ समितियों को 1,200 यूनिट तक मुफ्त बिजली की सुविधा मिलती रहेगी। बिजली वितरण कंपनियां बीएसईएस और टीपीडीडीएल समय पर बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराएंगी और यात्रा शुरू होने से पहले सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करेंगी। हालांकि, यदि किसी शिविर की बिजली खपत 1,200 यूनिट से अधिक होती है, तो अतिरिक्त खर्च संबंधित कांवड़ समिति को स्वयं वहन करना होगा।

कांवड़ समितियों को समय पर मिलेगी सहायता
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि कांवड़ समितियों को अनुदान राशि मिलने में होने वाली देरी को खत्म करने के लिए सरकार वितरण प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने जा रही है। इसके तहत अब अनुदान की अग्रिम और अंतिम दोनों किस्तें सीधे संबंधित जिलाधिकारी (डीएम) कार्यालयों के माध्यम से जारी की जाएंगी। उन्होंने बताया कि पहले अनुदान जारी करने के लिए प्रत्येक मामले में राजस्व मुख्यालय के जरिए वित्त विभाग से अलग-अलग मंजूरी लेनी पड़ती थी, जिससे प्रक्रिया में समय लगता था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इस अतिरिक्त मंजूरी की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे कांवड़ समितियों को समय पर आर्थिक सहायता मिल सकेगी। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस फैसले से पूरी व्यवस्था अधिक प्रभावी, पारदर्शी और सुचारु बनेगी। साथ ही वित्त विभाग भी वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करेगा।
सिंगल विंडो सिस्टम रहेगा लागू
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले वर्षों की तरह इस बार भी सिंगल विंडो सिस्टम लागू रहेगा, जिससे कांवड़ समितियों को विभिन्न विभागों से जुड़ी आवश्यक अनुमतियां और सुविधाएं आसानी से मिल सकेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि नगर निगम (एमसीडी) कांवड़ शिविरों और यात्रा मार्गों पर सफाई व्यवस्था, कूड़ा उठाने, फॉगिंग और स्वच्छता सुनिश्चित करेगा। वहीं स्वास्थ्य विभाग और सीएटीएस (CATS) की ओर से 24 घंटे डॉक्टरों, एम्बुलेंस, प्राथमिक उपचार केंद्रों और आवश्यक दवाओं की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। उन्होंने बताया कि दिल्ली जल बोर्ड श्रद्धालुओं के लिए स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराएगा और आवश्यकता पड़ने पर पानी के टैंकर भी मुहैया कराएगा। दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (डूसिब) मोबाइल शौचालयों की व्यवस्था करेगा और उनकी नियमित सफाई सुनिश्चित करेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांवड़ यात्रा-2026 के लिए अनुदान वितरण प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाएगा। इसके तहत पात्र कांवड़ समितियों का समय पर पंजीकरण, बैंक खातों का सत्यापन, आवश्यक दस्तावेजों की जांच और ऑडिट की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने बताया कि यात्रा शुरू होने से पहले और यात्रा समाप्त होने के बाद संबंधित एसडीएम और तहसीलदार कांवड़ शिविरों का निरीक्षण करेंगे। शिविरों की जियो-टैग्ड तस्वीरें और सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जाएगी, जिससे अनुदान वितरण में पारदर्शिता बनी रहे और सहायता राशि का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके।
मुख्यमंत्री के अनुसार, कांवड़ समितियों को अनुदान पहले की तरह डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से दो किस्तों में दिया जाएगा। पहली किस्त के रूप में कुल स्वीकृत अनुदान का 50 प्रतिशत अग्रिम भुगतान किया जाएगा, ताकि समितियां समय रहते शिविरों की तैयारियां पूरी कर सकें। उन्होंने कहा कि शेष 50 प्रतिशत राशि कांवड़ यात्रा संपन्न होने के बाद निर्धारित शर्तों के पालन, निरीक्षण और सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर जारी की जाएगी। इस व्यवस्था से सरकारी सहायता का पारदर्शी वितरण सुनिश्चित होगा और समितियों को समय पर वित्तीय सहयोग भी मिल सकेगा।
बढ़े अनुदान समेत सभी प्रस्ताव कैबिनेट में रखे जाएंगे
मुख्यमंत्री ने बताया कि समिति ने सिफारिश की है कि वर्ष 2025 में जिन कांवड़ समितियों और स्थलों को स्वीकृति दी गई थी, उसी सूची को वर्ष 2026 के लिए भी अंतिम माना जाए। इसके तहत इस वर्ष किसी नई कांवड़ समिति या नए स्थल को मंजूरी नहीं दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे व्यवस्थाओं के बेहतर संचालन, निगरानी और संसाधनों के प्रभावी उपयोग में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या और कांवड़ शिविरों के बढ़ते खर्च को देखते हुए सभी श्रेणियों के शिविरों की अनुदान राशि बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके साथ ही मुफ्त बिजली, स्वच्छ पेयजल, चिकित्सा सुविधाएं, मोबाइल शौचालय, सफाई व्यवस्था, सुरक्षा और यातायात प्रबंधन जैसी सेवाओं को भी मजबूत किया जाएगा।
रेखा गुप्ता ने कहा कि अनुदान वितरण की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाएगा। पात्र समितियों को सहायता राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से दो किस्तों में दी जाएगी और जियो-टैगिंग व निरीक्षण रिपोर्ट के जरिए इसकी निगरानी की जाएगी। मुख्यमंत्री के अनुसार, कांवड़ समितियों की आर्थिक सहायता में वृद्धि, अनुदान वितरण व्यवस्था में बदलाव और यात्रा प्रबंधन से जुड़े सभी प्रस्तावों को मंगलवार को होने वाली दिल्ली मंत्रिमंडल (कैबिनेट) की बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा। कैबिनेट की स्वीकृति मिलने के बाद इन फैसलों को लागू किया जाएगा।



