रायपुर

लॉकडाउन खुलते ही साइकिलों की डिमांड बढ़ी: हर माह 15 हजार बिक रहीं साइकिलें, एक्सरसाइज के लिए युवाओं का रुझान ज्यादा

रायपुर न्यूज़ धमाका // पिछले साल कोरोना लॉकडाउन खुलने के बाद लोगों की दिलचस्पी अचानक साइकिलिंग की तरफ बढ़ गई। अप्रैल में लॉकडाउन लगा। उसके बाद मई में लॉकडाउन खुला और अगले तीन-चार महीनों तक लोगों ने जमकर साइकिल खरीदे।

अकेले राजधानी रायपुर में ही हर महीने साढ़े सात हजार से ज्यादा साइकिलें बिकने लगीं। प्रदेश में 15 हजार से ज्यादा साइकिलें बिकीं, जबकि आमतौर पर सामान्य दिनों में हर महीने लगभग दस हजार साइकिलें ही बिकती रही हैं। कोरोना का पहला लॉकडाउन 19 मार्च से शुरू हुआ और यह 2021 तक जारी रहा।

अप्रैल 2021 में फिर से लॉकडाउन लगा। लगातार दो सालों तक महीनों घर में बंद रहने के बाद लोगों को सेहत की चिंता सताने लगी। इसलिए लॉकडाउन खुलते ही लोगों ने साइकिलें खरीदनी शुरू की। साइकिल खरीदने में ज्यादातर युवाओं का रुझान देखा गया।

15 से 35 हजार तक की साइकिलें खरीदी गईं। कारोबारियों का कहना है कि लॉकडाउन खुलने के बाद भी काफी दिनों तक जिम और गार्डन इत्यादि नहीं खोले गए। इस वजह से सेहत सुधारने के लिए लोगों ने साइकिलिंग को बेहतर समझा।

वर्ष 2021 के आखिरी तीन से छह महीने तक साइकिल से जुड़े कारोबारियों ने अच्छा मुनाफा कमाया। 2022 के शुरुआती तीन महीने में कारोबार फिर सामान्य है। अब स्कूल-कालेज खुलने पर ज्यादातर माता-पिता और युवा फिर से पढ़ाई इत्यादि पर खर्च करने लगे हैं।

कोरोना के बाद महंगाई इतनी बढ़ गई है कि लोग मूलभूत और जरूरी चीजों पर ही ध्यान दे रहे हैं। रायपुर में पंजाब साइकिल के संचालक ने बताया कि अब स्थिति ऐसी है कि मार्च में औसत से भी कम साइकिल बिके हैं। कोरोना के बाद यूक्रेन-रसिया युद्ध के कारण भी चीजें बहुत महंगी हो गई हैं।

इसलिए साइकिल की बिक्री थोड़ी कम हो गई है। गणेश ट्रेडिंग के संचालक का कहना है कि जिम और गार्डन इत्यादि खुलने के कारण लोग अब सेहत के लिए सामान्य दिनचर्या में लौटने लगे हैं। साइकिलों पर 15 से 40 हजार रुपए खर्च करना अब सबके लिए आसान नहीं है।

महंगी और स्पोर्ट्स साइकिल
कारोबारियों के अनुसार अब सामान्य साइकिलों की डिमांड नहीं रही। पहले दो-तीन ही ब्रांडेड कंपनियां सामान्य साइकिलें बनाती थीं। अब ज्यादातर डिमांड एडवेंचर और स्पोर्ट्स साइकिलों का है। इनकी कीमत 10 से 35 हजार रुपए तक है। साइकिल में विशेष रुचि रखने वाले और क्लब से जुड़ने वाले लोग ही महंगी साइकिलें खरीदते हैं। छोटे बच्चों की साइकिलें भी ढाई हजार से 10 हजार रुपए कीमत में उपलब्ध हैं।

छोटी साइकिलों की डिमांड कायम, 30 फीसदी बिक्री बढ़ी
द बाइसिकल कैफे के संचालक राघवेंद्र ने बताया कि पूरा मार्केट युवा और बच्चों की दो कैटेगरी में बंटा हुआ है। 30 फीसदी बिक्री छोटी साइकिलों और शेष 70 फीसदी बड़ी साइकिलों की रहती है। छोटे बच्चों की साइकिलों की बिक्री सामान्य है। कोरोना काल में भी यह स्थिर रही, जबकि बड़ी साइकिलों की बिक्री डेढ़ गुना तक बढ़ गई। वह अब सामान्य और उससे कम हो गई है।

कोरोना से पहले हर माह बिक्री

  • 5000 रायपुर
  • 10000 छत्तीसगढ़

कोरोना के बाद लॉकडाउन खुलते ही

  • 7500 रायपुर
  • 15000 छत्तीसगढ़

Chhattisgarh News Dhamaka Team

अमन चीफ एडिटर - छत्तीसगढ़ न्यूज़ धमाका // प्रदेश उपाध्यक्ष, छग जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन छत्तीसगढ // ; हरिभूमि ब्यूरो चीफ जिला कोंडागांव // 18 सालो से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। विश्वसनीय, सृजनात्मक व सकारात्मक पत्रकारिता में विशेष रूचि। कृषि, वन, शिक्षा; जन जागरूकता के क्षेत्र की खबरों को हमेशा प्राथमिकता। जनहित के समाचारों के लिये तत्परता व् समर्पण// जरूरतमंद अनजाने की भी मदद कर देना पहली प्राथमिकता

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