
बिलासपुर न्यूज धमाका – कोयले के परिवहन के दौरान उड़ने वाली धूल (कोल डस्ट) और उससे आम जनता को हो रही गंभीर परेशानियों पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र अग्रवाल की खंडपीठ ने SECL की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा:
“यह तो वही बात हो गई कि हम शराब बेचते हैं, बाकी पीने वाला जाने।”
क्या है मामला?
SECL (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) द्वारा उत्पादित कोयले के परिवहन के दौरान उड़ने वाली कोल डस्ट से आम नागरिकों को प्रदूषण, दुर्घटना, कीचड़, सड़कों की दुर्दशा और स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसके विरुद्ध दायर याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई।
SECL ने जवाब में कहा कि वे केवल कोयला उत्पादन करते हैं, उसका परिवहन ट्रांसपोर्टर द्वारा किया जाता है, इसलिए डस्ट या सड़क की स्थिति उनकी जिम्मेदारी नहीं।
कोर्ट की तीखी प्रतिक्रिया
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने SECL के तर्क को सिरे से खारिज करते हुए कहा:
- “आप कोयला उत्पादन कीजिए, किसी को आपत्ति नहीं। लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि आपके कारण लोग अस्थमा से मरें, या सड़क पर कीचड़, गड्ढों से जान गंवाएं।”
- “हम ट्रांसपोर्टिंग बंद करवा देते हैं, फिर आप रखिए अपना कोयला अपने पास। यह नहीं चलेगा कि सब जिम्मेदारी ट्रांसपोर्टर पर डाल दी जाए।”
माइनिंग एरिया में मर्डर पर भी कोर्ट सख्त
सुनवाई के दौरान SECL के वकील ने माइनिंग एरिया में नियमों के पालन का दावा किया, जिस पर चीफ जस्टिस ने और भी तीखी टिप्पणी की:
“कल ही तो आप एक मर्डर केस में अपोज कर रहे थे। ट्रांसपोर्टरों की लड़ाई में एक व्यक्ति की हत्या हो गई और आप कह रहे हैं सब नियमों का पालन हो रहा है? ये सब तर्क मत दीजिए।”
अदालत के निर्देश:
- SECL को नया शपथ पत्र (अफिडेविट) प्रस्तुत करने का निर्देश।
- परिवहन से संबंधित जवाबदेही तय करने को कहा।
- कोल डस्ट से प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति सुधारने और योजना प्रस्तुत करने को कहा गया।
सार्वजनिक जीवन को नुकसान, जिम्मेदारी कौन लेगा?
चीफ जस्टिस की यह टिप्पणी न केवल SECL पर, बल्कि केंद्र और राज्य की उन नीतियों पर भी सवाल उठाती है, जहाँ “विकास” के नाम पर सामान्य नागरिकों के जीवन और स्वास्थ्य की कीमत चुकाई जाती है। अदालत ने साफ किया — विकास जरूरी है, लेकिन जनता की जान की कीमत पर नहीं।
