
सरगुजा न्यूज धमाका – मॉनसून की बारिश जहां किसानों के लिए राहत लेकर आती है, वहीं सरगुजा जिले के बतौली क्षेत्र में मंगलवार का दिन दो परिवारों के लिए कयामत बनकर टूटा। अलग-अलग स्थानों पर आकाशीय बिजली गिरने से एक 17 वर्षीय छात्र और एक 28 वर्षीय युवक की मौके पर ही मौत हो गई। इन दर्दनाक हादसों से पूरे क्षेत्र में दहशत और मातम का माहौल है।
पहली घटना: खेत में रोपाई करते छात्र पर गिरा कहर
बतौली थाना क्षेत्र के ग्राम कुनकुरीकला निवासी रोशन पैंकरा (17 वर्ष), पिता स्व. चेतन राम, अपनी मां लीलावती पैंकरा के साथ खेत में रोपाई करने गया था। अचानक तेज बारिश और गरज-चमक के साथ बिजली गिरी, जिससे रोशन की मौके पर ही मौत हो गई।
अपनी आंखों के सामने इकलौते बेटे को यूं खो देने का ग़म मां लीलावती सह नहीं सकी — वह सदमे में है, और पूरे गांव में शोक की लहर है।
दूसरी घटना: पेड़ के नीचे खड़े युवक की मौत
दूसरी घटना ग्राम माजा की है, जहां अनिल नगेशिया (28 वर्ष), निवासी दरिमा थाना, अपनी पत्नी और ससुराल के अन्य परिजनों के साथ ग्राम कर्रा पाटीपारा के खेत में रोपाई कर रहा था। बारिश तेज होने पर अनिल पास के जामुन के पेड़ के नीचे खड़ा हो गया, तभी बिजली उसी पेड़ पर गिरी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
घटना के समय उसकी पत्नी, सास और अन्य परिजन वहीं मौजूद थे। आंखों के सामने अनिल की मौत होते देख पत्नी बेसुध हो गई और परिजन गहरे सदमे में हैं।
पुलिस जांच व कार्रवाई
दोनों मामलों में बतौली पुलिस द्वारा मर्ग कायम किया गया है। शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है।
स्थानीय प्रशासन ने परिवारों को आर्थिक सहायता देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, लेकिन उनकी जिंदगी में जो खालीपन आ गया है, उसकी भरपाई मुमकिन नहीं।
तेज बारिश और बिजली गिरने की बढ़ती घटनाएं
बतौली क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से लगातार बिजली गिरने की घटनाएं सामने आ रही हैं। हाल ही में मंगारी कोलता पारा और गोविंदपुर में भी इसी तरह के हादसे में दो लोगों की जान जा चुकी है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे के लिए भारी बारिश और वज्रपात की चेतावनी जारी की है।
जनता से अपील: सतर्क रहें, सुरक्षित रहें
प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि:
- बिजली गरजते समय खुले मैदान में न रहें।
- पेड़ या टावर के नीचे शरण न लें।
- खेतों या ऊंचे स्थानों से दूर रहें।
- मोबाइल का उपयोग खुले में न करें।
श्रद्धांजलि
इन दोनों युवाओं की असमय मृत्यु ने यह सवाल फिर खड़ा कर दिया है कि क्या हम वज्रपात जैसे प्राकृतिक संकटों के लिए पर्याप्त रूप से जागरूक हैं?
समय है कि हम सुरक्षा उपायों को गंभीरता से लें, ताकि और किसी मां की गोद न सूने, और किसी पत्नी का सुहाग यूं न उजड़े।
