
नक्सल प्रभावित क्षेत्र बस्तर और आदिवासी बहुल सरगुजा की महिलाएं सशक्तीकरण की मिसाल पेश कर रही हैं।
रायपुर न्यूज़ धमाका // छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्र बस्तर और आदिवासी बहुल सरगुजा की महिलाएं सशक्तीकरण की मिसाल पेश कर रही हैं। ये महिलाएं बस्तर काफी, कांकेरवैली सीताफल, बस्तर की ईमली कैंडी, नारायणपुर का फूल झाड़ू, कोरिया के सवई घास से बनने वाले उत्पाद और जांजगीर के रेशम के कपड़े के काम में हाथ आजमा रही हैं।
पहले इन कामों पर पुरुषों का वर्चस्व रहा है। सरगुजा में मसाला उद्योग, बस्तर में प्रसंस्कृत काजू, काजू कुकीज, महुआ कुकीज, चोको चिप्स, नारायणपुर में कोदो, कुटकी और रागी जैसे मिलेट्स का भी उत्पादन किया जा रहा है। मैनपाट के टाऊ के आटे की मांग अब दुबई में भी होने लगी है। महिला स्वसहायता समूह के कई उत्पाद राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं।
बस्तर के दूरस्थ ब्लाक बकावंड में स्व-सहायता समूह की महिलाएं काजू का संग्रहण और प्रसंस्करण का काम कर रही हैं। यहां काजू संग्रहण और प्रसंस्करण से अब तक करीब 76 लाख रुपये की आमदनी हो चुकी है। यहां 50 से अधिक महिलाओं को रोजगार उपलब्ध हो रहा है। सरगुजा में बिहान अंतर्गत गठित समूह मसाला फसलों का उत्पादन और प्रसंस्करण कर रहा है। महिला समूह ने 11 लाख रुपये से अधिक के उत्पाद बेचे हैं।
फूड प्रोसेसिंग के लिहाज से बस्तर में तेजी से काम हो रहा है। यहां राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत 27 और छह वन विकास केंद्रों के अंतर्गत सात फूड प्रोसेसिंग यूनिट संचालित हैं। लघुवनोपज की प्रोसेसिंग के लिए 57 यूनिट की स्थापना की गई है, जिसमें 15 उत्पाद तैयार हो रहे हैं। इस काम में करीब 15 सौ सदस्य कार्यरत हैं और वार्षिक टर्नओवर 19.17 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
मिलेट्स उत्पादन से आर्थिक संबलता
नारायणपुर जिले में दंतेश्वरी महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने खेती में नवाचार किया है। दो वर्षों से कोदो, कुटकी और रागी जैसे मिलेट्स का उत्पादन कर इन लघु धान्य फसलों का प्रसंस्करण कर रही हैं। दुर्गकोंदल के घोटूलमुंड़ा गांव में कोदो और रागी का प्रसंस्करण किया जा रहा है। तीरथगढ़ की स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने हाइटेक तरीके से पपीता की पैदावार की और सात महीने में ही 30 लाख रुपये की आमदनी हुई।
मैनपाट के टाऊ की मांग दुबई तक
सरगुजा के मैनपाट में टाऊ के आटे का उत्पादन बिहान महिला किसान उत्पाद कंपनी कर रही है। टाऊ के आटे की मांग अब दुबई में भी होने लगी है। महिलाओं की इस कंपनी को दुबई से 120 किलोग्राम आटे का पहला आर्डर भी मिल चुका है। इससे महिलाएं और टाऊ का उत्पादन करने वाले किसान आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ रहे हैं।
ग्रामीण महिलाओं ने संभाली राइस मिल की कमान
राज्य सरकार की मदद से स्वावलंबन की ओर बढ़ते हुए मुंगेली में ग्रामीण महिलाएं राइस मिल का संचालन कर रही हैं। यहां महिलाओं के द्वारा ही धान और गेंहू की मिलिंग की जा रही है। बाजार से कम दर पर मिलिंग होने से बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंच रहे हैं। मिनी राइस मिल मशीन में मसाला पिसाई भी हो रही है।
– गोठान बन रहे रूरल इंडस्ट्रीयल पार्क
– राज्य में 140 फूड पार्कों की स्थापना की पहल

