रायपुर,न्यूज़ धमाका :- अलका (परिवर्तित नाम) कहां की रहने वाली है, ये कोई नहीं जानता। न तो वो ठीक से बात कर पाती है, न ही कोई उसके साथ है। यहां-वहां घूमती रहती अलका एक दिन आंबेडकर अस्पताल के प्रतीक्षालय में आकर रुक गई। यहां उसे स्त्रीजनित परेशानियां होने लगी पर वो अस्पताल के भीतर तक नहीं जाना चाहती थी। आपसी चर्चाओं में अस्पताल की एक नर्स को इसके विषय में जानकारी मिली। उसने अलका को भर्ती कराया। उसका उपचार कराया। अलका ठीक हो गई।
मदर टेरेसा आश्रम में काट रही जीवन
इन नर्सो की सेवा भावना से प्रेरित होकर कई सामाजिक संगठनों वाले भी इन्हें समय-समय पर सहायता देते रहते हैं। अब समस्या ये थी कि वो अस्पताल के बेड को छोड़ना नहीं चाहती थी। उसे इस बात की चिंता थी कि वो बाहर निकली तो फिर कहां जाएगी? न जाने वह कौन सी भाषा में बात करती थी पर नर्स को यही समझ आया कि यहां उसका कोई भी नहीं है। नर्स ने रायपुर के मदर टेरेसा आश्रम में बात करके अलका को वहां भिजवा दिया। अब इस आश्रम में अलका सब्जी काटना, फूलों का पानी देने और साफ-सफाई का काम करती है। काम के एवज में वह सम्मान के साथ वहां भोजन करती है। लोग बताते हैं कि अब अलका के चेहरे का रंग बदल गया है। कल तक मुरझाई और भयभीत दिखने वाली अलका के चेहरे पर अब शांति और आत्मविश्वास दिखने लगा है।
