
रायपुर न्यूज़ धमाका /// पुलिस परिवार आंदोलन की राह पर चल पड़ा है। वेतन और प्रमोशन की मांग को लेकर सोमवार को सहायक आरक्षकों के परिजनों ने भाठागांव बस टर्मिनल पहुंचकर दिनभर न सिर्फ प्रदर्शन किया, बल्कि आंदोलन का नेतृत्व कर रहे उज्जवल दीवान को पुलिस हिरासत में लेने का कड़ा विरोध भी किया। उसे रिहा कराने को लेकर सैकड़ों पुलिस परिवारों की महिलाएं भाठागांव से पैदल ही आमानाका थाने का घेराव करने निकलीं।
बारिश में भीगते हुए महिलाएं थाना परिसर पहुंचीं और जमकर हंगामा किया। यही नहीं, पुलिस परिवारों ने भाठागांव में नेशनल हाईवे पर चक्काजाम कर दिया। सड़क पर बैठकर महिलाओं ने जमकर नारेबाजी की। मौके पर पहुंचे पुलिस अफसरों ने समझाइश देकर मामला शांत कराया। करीब घंटेभर बाद महिलाएं हाईवे से हटीं। वहीं अब रायपुर में पुलिसकर्मियों की मांग को लेकर आंदोलन करने की सुगबुगाहट होने लगी है।
रायपुर जिला पुलिस बल में करीब 3500 पुलिस जवान हैं। इनमें 2900 आरक्षक व प्रधान आरक्षक, 550 एएसआई-एसआई और टीआई तथा 50 से अधिक अफसर हैं। इनमें 1600 से 1700 पुलिसकर्मियों की थाने में तैनाती है। बाकी 1800 से 1900 पुलिसकर्मियों को वीआईपी सुरक्षा, प्रतिष्ठानों की सुरक्षा, पुलिस मुख्यालय, पुलिस दफ्तर और ट्रैफिक व्यवस्था मंं तैनात किया गया है। अगर इनमें से बल की कटौती कर थानों में तैनात कर दिया जाए तो आसानी से जवानों को साप्ताहिक अवकाश मिल सकता है।
जानकारी के मुताबिक कोरोनाकाल से पहले सिविल लाइंस, कोतवाली, आजाद चौक, पुरानी बस्ती, खमतराई, माना, राखी समेत ग्रामीण इलाके के एक पुलिस थाने में साप्ताहिक अवकाश की शुरुआत की गई थी। थानेदार को रात की गश्त के बाद दिन में थाना नहीं आने की छूट दी गई थी, लेकिन महीनेभर में वह भी बंद कर दी गई। पुलिस परिवार इस मांग को लेकर मुखर हो सकते हैं।
पुलिस परिवारों की अगुवाई करने वाले उज्जवल दीवान को आमानाका थाने में रखने की भनक लगी, जिसके बाद सैकड़ों महिलाएं आमानाका थाना घेरने निकल पड़ीं। पैदल ही भाठागांव से नेशनल हाईवे के रास्ते निकलीं। सड़क के दोनों तरफ उनके साथ पुलिस बल भी पैदल निकल पड़ा। करीब घंटेभर बाद सभी महिलाएं थाने पहुंचीं और उज्जवल को रिहा करने नारेबाजी की। पुलिस अफसरों ने महिलाओं को समझाइश देकर शांत कराया।

