
रायपुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे भारतवर्ष और विदेशों में अपनी हास्य-व्यंग्य कविताओं से लाखों दिलों को गुदगुदाने वाले पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे आज पंचतत्व में विलीन हो गए। उनका अंतिम संस्कार आज रायपुर के मारवाड़ी श्मशान घाट में संपन्न हुआ, जहां राजनीति, साहित्य और कला जगत की बड़ी हस्तियों ने उन्हें अंतिम विदाई दी।
एक युग का अवसान
डॉ. दुबे का निधन 26 जून की रात रायपुर के एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट (ACI) में तीन बार कार्डियक अरेस्ट आने के बाद हुआ। वह 72 वर्ष के थे। उनकी मृत्यु की खबर से न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे हिंदी साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई।
मंच के कलाकार, समाज के चिंतक
डॉ. सुरेंद्र दुबे ने हास्य और व्यंग्य को केवल हँसी तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने अपने लेखन के माध्यम से राजनीति, समाज और मानवीय संवेदनाओं को भी गहराई से छुआ। उनकी कविताओं में व्यंग्य के साथ-साथ एक गंभीर संदेश भी होता था।
सम्मान और उपलब्धियाँ
- 2010 में उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
- 2008 में काका हाथरसी हास्य रत्न पुरस्कार,
- 2012 में पंडित सुंदरलाल शर्मा सम्मान,
- अमेरिका में हास्य शिरोमणि और छत्तीसगढ़ रत्न जैसे अंतरराष्ट्रीय सम्मान उन्हें मिले।
- उनकी रचनाओं पर तीन विश्वविद्यालयों में पीएचडी की जा चुकी है।

विदेशों तक पहुंची छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबू
बेमेतरा से निकलकर वाशिंगटन और शिकागो तक अपनी हास्यकविता की गूंज पहुंचाने वाले डॉ. दुबे ने छत्तीसगढ़ी भाषा को वैश्विक मंचों तक पहुंचाया। उन्होंने ना केवल भारत, बल्कि अमेरिका, कनाडा, यूके आदि देशों में भी कविता पाठ कर छत्तीसगढ़ की संस्कृति का परचम लहराया।
जनप्रिय और आत्मीय व्यक्तित्व
उनके अंतिम संस्कार में भाजपा प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, गृहमंत्री विजय शर्मा, वरिष्ठ मंत्री रामविचार नेताम, चर्चित कवि कुमार विश्वास, सूफी गायक पद्मश्री मदन चौहान, कवि सुदीप भोला और अभिनेता-गायक सुनील तिवारी सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।

“मंच पर जो हँसाता था, आज आँखें नम कर गया। शब्दों का वो जादूगर अब मौन हो गया।”
डॉ. सुरेंद्र दुबे अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी रचनाएं, शैली और स्मृतियाँ हमेशा हँसी के साथ हमें सोचने पर मजबूर करती रहेंगी।



