
ईपीएफओ में ई-नामांकन कराना जरूरी हो गया है। ऐसा नहीं करने वाले अंशदाताओं की पेंशन व अन्य लाभ अटक सकते हैं। यह बात खुद मप्र व छग के भविष्य निधि आयुक्त अजय मेहरा व अन्य अधिकारियों की तरफ से कही गई है। साथ ही व्यापम अभियान भी चलाया जा रहा है जिसके तहत नियोक्ता और अंशदाताओं को प्रेरित किया जा रहा है।
दरअसल, भोपाल क्षेत्र में 3 लाख 36 हजार 571 अंशदाता है। इनमें से महज 10 हजार 47 ने ही ई-नामांकन कराया है। मप्र-छग भविष्य निधि आयुक्त अजय मेहरा ने अभियान को लेकर व्यापक दिशा-निर्देश दिए हैं। क्षेत्रीय कार्यालय भोपाल के भविष्य निधि आयुक्त वर्ग-एक अमिताभ प्रकाश ने बताया कि विभाग ने सभी नियोक्ताओं को शतत संवाद के जरिए ई-नामांकन कराने के लिए प्रेरित किया है। अमिताभ प्रकाश ने बताया कि ई-नामांकन कराने की जिम्मेदारी नियोक्ता की है ताकि कर्मचारी के न रहने पर उसके आश्रितों को पेंशन समेत अन्य देयकों का आसानी से भुगतान किया जा सके। पूर्व में कोरोना संक्रमण के कारण कई आश्रितों को परेशान होना पड़ा है।
ऐसे करें ई-नामांकन
– ईपीएफओ पोर्टल में सर्विसेस सेक्शन में फार एम्प्लाइज पर क्लिक करें।
– सदस्य यूएनए, आनलाइन सर्विस पर क्लिक करें।
– मेंबर पोर्टल जनरेट न हो तो पहले मेंबर पोर्टल जनरेट करें।
– यूएनए नंबर और पासवर्ड डालकर लागइन करें।
– प्रोफाइल पर क्लिक कर सदस्य अपना फोटो और अन्य जानकारी अपडेट करें।
सदस्य पोर्टल पर मैनेज पर ई नामीनेशन का चयन करें।
– एड फेमिली डिटेल्स पर क्लिक करें और संबंधित का आधार नंबर एवं अन्य डिटेल और फोटो के साथ एड करें। फेमिली में एक से अधिक सदस्य है तो एड-रो पर क्लिक करें और इसी प्रक्रिया को दोहराएं।
– पूरे परिवार का डिटेल अपडेट करने के बाद सेव फेमिली डिटेल पर क्लिक करें। सि नामिनी को कितना प्रतिशत देना है उसे अपडेट करें और सेव ई नामीनेशन पर क्लिक करें।
आधार की वेबसाइट से सदस्य का आधार नंबर डालकर वर्चुअल आइडी जनरेट करें, जो सदस्य के आधार में रजिस्टर्ड मोबाइल पर एसएमएस के जरिए आएगी।
– अगले सदस्य पोर्टल पर ई-साइन पर क्लिक करें।
– अगले स्टेप पर आधार से जो वर्चुअल आइडी डालकर ओटीपी जनरेट पर क्लिक करें। पुन: आधार से लिंक मोबाइल पर छह अंकों का ओटीपी आएगा। ओटीपी को निर्धारित स्पेस पर डालकर सेव करें।
सफल ई-नामांकन पर ई नामीनेशन प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और सदस्य ई-नामांकन की पीडीएफ फाइल डाउनलोड कर सकते हैं।
– ई-नामांकन में सदस्य को कोई दस्तावेज नियोक्ता या पीडीएफ आफिस में नहीं भेजना है और न ही नियोक्ता से स्वीकृत कराना है।


