छतीसगढ़कवर्धा

हिरण के शावक की डंडे से पीट-पीटकर हत्या, शव को पत्तों से ढंककर छिपाया, सूचना के बावजूद मौके पर नहीं पहुंचा वन विभाग

कवर्धा न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में एक निर्दयी घटना सामने आई है, जहां एक हिरण के शावक को डंडे से पीट-पीटकर मार डाला गया। घटना पंडरिया ब्लॉक के नेऊर ग्राम पंचायत के पास की है। ग्रामीणों के अनुसार, खेत में घुस आए हिरण को मांस के लालच में खेत मालिक ने बेरहमी से पीटा, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।


शव को पत्तों से ढंककर छिपाया गया

ग्रामीणों ने बताया कि हत्या के बाद हिरण के शव को खेत के मेड़ पर पत्तों से ढंक दिया गया, ताकि लोगों की नजर न पड़े। आरोपी योजना बना रहा था कि रात के अंधेरे में शव को जंगल से बाहर ले जाए। लेकिन ग्रामीणों की नजर जब शव पर पड़ी तो उन्होंने तुरंत वन विभाग को सूचना दी।


वन विभाग की लापरवाही उजागर

सूचना मिलने के बावजूद वन विभाग का कोई कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा। ग्रामीणों का आरोप है कि स्थानीय बीट क्रमांक 477 में तैनात वनरक्षक नियमित ड्यूटी से गैरहाजिर रहते हैं और जंगल की निगरानी चौकीदारों के भरोसे चल रही है।

वन अमले की यह घोर लापरवाही वन्यप्राणियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। मृत हिरण के सिर पर गंभीर चोट के निशान मिले हैं, जिससे उसकी हत्या की पुष्टि होती है।


जंगलों पर अतिक्रमण बना जानवरों के लिए खतरा

कबीरधाम जिले के जंगलों में अतिक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। लोग जंगल की जमीन पर अवैध रूप से खेती और मकान निर्माण कर रहे हैं, जिससे वन्यप्राणियों का प्राकृतिक आवास सिकुड़ रहा है। यही कारण है कि हिरण जैसे जानवर भूख और डर के कारण मानव बस्तियों की ओर आ जाते हैं और शिकारियों के हाथों मारे जाते हैं।


ग्रामीणों की मांग: सख्त कार्रवाई हो

ग्रामीणों ने मांग की है कि:

  • आरोपी खेत मालिक पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाए।
  • वन विभाग के लापरवाह कर्मचारियों पर विभागीय जांच कर कार्रवाई की जाए।
  • बीट एरिया की सघन निगरानी और रात्रिकालीन गश्त अनिवार्य की जाए।

क्या कहता है कानून?

हिरण भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत संरक्षित प्राणी है। इसके शिकार पर सजा और जुर्माने का प्रावधान है, जिसमें 3 से 7 साल की सजा और ₹25,000 तक का जुर्माना हो सकता है।


निष्कर्ष: यह घटना न केवल वन्यप्राणी संरक्षण की विफलता है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कैसे मानव लालच और सरकारी उदासीनता के कारण जंगल और उसके बाशिंदे लगातार संकट में हैं। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो ऐसी घटनाएं आने वाले समय में और भयावह रूप ले सकती हैं।

Chhattisgarh News Dhamaka Team

अमन चीफ एडिटर - छत्तीसगढ़ न्यूज़ धमाका // प्रदेश उपाध्यक्ष, छग जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन छत्तीसगढ // ; हरिभूमि ब्यूरो चीफ जिला कोंडागांव // 18 सालो से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। विश्वसनीय, सृजनात्मक व सकारात्मक पत्रकारिता में विशेष रूचि। कृषि, वन, शिक्षा; जन जागरूकता के क्षेत्र की खबरों को हमेशा प्राथमिकता। जनहित के समाचारों के लिये तत्परता व् समर्पण// जरूरतमंद अनजाने की भी मदद कर देना पहली प्राथमिकता

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