
गरियाबंद न्यूज धमाका – रेंज के घने जंगलों में स्थित गजपल्ला वॉटरफॉल मंगलवार दोपहर एक मौत का गवाह बना। रायपुर से घूमने आई 19‑वर्षीय महविस खान की वाटरफॉल के गहरे पानी में डूबने से मृत्यु हो गई। हादसे के समय महविस अपनी चार सहेलियों और दो युवकों के साथ स्थल पर पहुंची थी।
हादसा कैसे हुआ?
- प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, महविस ने “गहराई नापने” के इरादे से जलप्रपात के नीचे उतरना चाहा।
- तेज जलधारा और असमान गहराई ने उसे कुछ ही सेकंड में अपनी चपेट में ले लिया।
- घटना लगभग दोपहर 2–3 बजे के बीच घटी। साथी युवाओं की शोर‑शराबे के बाद भी स्थानीय लोग या बचावकर्मी समय पर नहीं पहुंच सके।
रेस्क्यू में देरी, सुरक्षा शून्य
| कारक | स्थिति |
|---|---|
| सुरक्षा‑बाड़ / चेतावनी बोर्ड | अनुपस्थित |
| स्थायी लाइफ़गार्ड / कर्मी | नियुक्त नहीं |
| मोबाइल नेटवर्क | कई क्षेत्रों में दुर्बल |
| पहुंच मार्ग | जंगल के भीतर कई संकरे रास्ते, कुछ मार्गों पर रोक के बावजूद पर्यटक पहुंच जाते हैं |
वन विभाग के एसडीओ मनोज चंद्राकर ने पुष्टि की कि गजपल्ला वॉटरफॉल पर्यटकों के लिए “अलाउ” नहीं है। सुरक्षा प्रबंधन न होने के कारण पहले ही चेतावनी जारी की गई थी।
एक दिन पहले भी छपी थी चेतावनी
स्थानीय मीडिया ने 14 जुलाई को ही गजपल्ला व चिंगरापगार जलप्रपातों में लापरवाही और सुरक्षा‑चूक पर खबर प्रकाशित की थी, लेकिन न पर्यटक सतर्क हुए, न प्रशासन ने कड़ाई दिखाई।
परिवार व प्रशासन के बीच सवाल‑जवाब
- परिजनों का आरोप: “यदि मौके पर चेतावनी‑पट्टिका या बचावकर्मी होते, तो हादसा टल सकता था।”
- वन विभाग का पक्ष: “क्षेत्र प्रतिबंधित है; कई बार रोक‑टोक के बावजूद लोग वैकल्पिक रास्तों से पहुंच जाते हैं।”
- पुलिस ने मर्ग (अकस्मात् मृत्यु) कायम कर विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
अब आगे क्या?
- स्थायी प्रतिबंध और फेंसिंग—जंगल के भीतर स्थित ऐसे जलप्रपातों को या तो पर्यटक‑अनुकूल बनाया जाए या स्पष्ट रूप से बंद किया जाए।
- आपदा‑प्रबंधन सेल—वन विभाग, पुलिस और आपदा‑राहत टीम का संयुक्त “रैपिड‑रिस्पॉन्स” तंत्र बने।
- जन‑जागरूकता—स्थानीय प्रशासन को स्कूल‑कॉलेजों और सोशल‑मीडिया के माध्यम से सुरक्षा निर्देश नियमित रूप से प्रसारित करने होंगे।



