
रायपुर न्यूज धमाका – देशभर में आज ट्रेड यूनियनों द्वारा आहूत ‘भारत बंद’ का व्यापक असर देखने को मिला। राजधानी रायपुर में सैकड़ों कर्मचारियों और मजदूरों ने केंद्र सरकार की श्रमिक-विरोधी और कॉरपोरेट समर्थक नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
पंडरी स्थित एलआईसी कार्यालय परिसर में ट्रेड यूनियनों से जुड़े कर्मचारियों ने हड़ताल करते हुए सभा का आयोजन किया, जिसमें श्रमिकों के अधिकारों को लेकर जोरदार आवाज उठाई गई।
क्या हैं प्रमुख मुद्दे?
ट्रेड यूनियन नेताओं का कहना है कि मौजूदा सरकार की नीतियाँ:
- श्रमिकों के हितों के खिलाफ हैं
- निजीकरण और ठेकाकरण को बढ़ावा दे रही हैं
- न्यूनतम वेतन, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा के अधिकारों को खत्म कर रही हैं
- महंगाई, बेरोजगारी, और किसान संकट को अनदेखा कर रही हैं
25 करोड़ से अधिक कर्मचारियों का समर्थन
इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल में:
- बैंकिंग, बीमा, डाक, परिवहन, कोयला, स्टील, टेलीकॉम, निर्माण, रेलवे सहित कई क्षेत्रों के 25 करोड़ से अधिक कर्मचारी शामिल हुए हैं।
- हड़ताल का समर्थन संयुक्त किसान मोर्चा ने भी किया है।
नेताओं की प्रमुख माँगें
ट्रेड यूनियन नेता धर्मराज महापात्र ने बताया कि यह हड़ताल सिर्फ आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए भी है।
प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से निम्नलिखित मांगें रखीं:
- न्यूनतम वेतन ₹26,000 प्रतिमाह किया जाए
- पुरानी पेंशन योजना बहाल की जाए
- सरकारी क्षेत्रों में नई भर्ती शुरू की जाए
- प्रस्तावित बीमा संशोधन विधेयक वापस लिया जाए
- एफडीआई और निजीकरण पर रोक लगाई जाए
- श्रम संहिताओं को तुरंत वापस लिया जाए
- जाति, धर्म के नाम पर हो रहे फसादों पर रोक लगे
- 35 घंटे का कार्य सप्ताह लागू किया जाए
- महिलाओं, दलितों और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार पर सख्त कार्रवाई हो
रायपुर में क्या हुआ?
- राजधानी में एलआईसी, बीमा, बैंक, डाक और अन्य क्षेत्रों के कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार किया।
- प्रदर्शनकारी एलआईसी के मंडल कार्यालय (पंडरी) में एकत्र हुए और संयुक्त सभा का आयोजन किया।
- सभा में विभिन्न यूनियन नेताओं ने श्रमिक हितों, जन कल्याण और संवैधानिक मूल्यों को बचाए रखने की अपील की।
निष्कर्ष
यह भारत बंद महज एक औपचारिक विरोध नहीं, बल्कि देश के मजदूरों, किसानों और आम जनता की आवाज बन कर उभरा है। सरकार को श्रमिक संगठनों की मांगों पर विचार करते हुए नीतिगत बदलाव करने की आवश्यकता है ताकि विकास की रफ्तार के साथ-साथ सामाजिक न्याय और समावेशिता भी सुनिश्चित हो सके।



