
13 जून 2026
रायपुर न्यूज़ धमाका – पं. हरिशंकर शुक्ल स्मृति महाविद्यालय में पाँच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम आयोजित किया गया था। जिसमें विशेषज्ञों भारतीय संस्कृति को लेकर अपने विचार व्यक्त किये।
छत्तीसगढ़ के पं. हरिशंकर शुक्ल स्मृति महाविद्यालय में पाँच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के अंतिम दिवस मुख्य वक्ता मुकेश चंद्राकर ने कहा कि भारतीय चिंतन केवल आर्थिक उन्नति तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रकृति, समाज और मानव के मध्य संतुलित संबंध स्थापित करने की प्रेरणा देता है। शिक्षा के माध्यम से भारतीय जीवन मूल्यों, पर्यावरणीय चेतना और सामाजिक उत्तरदायित्व को बढ़ावा देकर सतत् विकास के लक्ष्यों को प्रभावी रूप से प्राप्त किया जा सकता है।
विशेषज्ञों ने अपने विचार किए व्यक्त
इन पांच दिनों के दौरान विभिन्न विषय विशेषज्ञों ने भारतीय ज्ञान प्रणाली के विविध आयामों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रथम दिवस पर डॉ. दिव्या शर्मा ने भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित पर्यावरण संरक्षण एवं सतत् जीवन शैली के सिद्धांतों पर प्रकाश डाला। द्वितीय दिवस पर डॉ. अरविंद पांडे ने शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से सतत् विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में भारतीय ज्ञान प्रणाली की भूमिका को रेखांकित किया।

सांस्कृतिक मूल्य और शिक्षा विकास की आधारशिला
तीसरे दिन डॉ. प्रेरणां शैलेट ने भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों एवं नैतिक शिक्षा को सतत् विकास की आधारशिला बत्ताया। चतुर्थ दिवस पर डॉ. नीति भोला ने भारतीय ज्ञान परंपरा में समाहित समावेशिता, सामाजिक न्याय और मानवीय मूल्यों के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। अंतिम दिवस पर श्री मुकेश चंद्राकर ने भारतीय ज्ञान प्रणाली को वर्तमान वैश्विक चुनौतियों के समाधान का प्रभावी माध्यम बताया।
शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने की सहभागिता
पाँच दिवसीय इस कार्यक्रम में शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। प्रश्नोत्तर सत्रों एवं विचार-विमर्श के माध्यम से प्रतिभागियों को विषय की गहन समझ प्राप्त हुई। कार्यक्रम के समापन अवसर डॉ पदमा बोहरे ने सभी वक्ताओं, प्रतिभागियों एवं आयोजन समिति के सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।
महाविद्यालय के चेयरमैन ने दी जानकारी
महाविद्यालय के चेयरमैन सुशील शुक्ला ने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए मार्गदर्शक शक्ति है। प्राचार्य डॉ ममता शर्मा ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम शिक्षकों की शैक्षणिक स्तर एवं शोध क्षमता को समृद्ध करते हैं तथा उन्हें भारतीय दृष्टिकोण के साथ वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए प्रेरित करते हैं। भारतीयता के मूल स्वर को हमेशा अपने साथ लेकर चलने का आव्हान किया।




