
बिलासपुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ की जेल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बिलासपुर हाई कोर्ट ने एक चौंकाने वाले मामले में राज्य के जेल कर्मियों द्वारा हत्या के आरोपी कैदी की पत्नी को वसूली के लिए जरिया बनाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। मामले में डीजी जेल को नोटिस जारी कर व्यक्तिगत शपथ पत्र के साथ पूरी जानकारी तलब की गई है।
वसूली का नया तरीका: कैदियों की पत्नियों से करवाते थे ट्रांजेक्शन
राज्य सरकार की ओर से अदालत में पेश जवाब में बताया गया कि एक हत्या के मामले में जेल में बंद कैदी की पत्नी लुकेश्वरी जोश अब्राहम को जेल कर्मियों ने अन्य कैदियों के परिजनों से पैसा वसूलने के लिए माध्यम बनाया। वसूली गई राशि को अलग-अलग बैंक खातों में जमा करवाया गया, जिनमें से एक खाता स्वयं याचिकाकर्ता का भी है।
यह जानकारी सामने आते ही हाई कोर्ट ने गंभीर नाराजगी जताई और डीजीपी (जेल) को नोटिस जारी कर व्यक्तिगत रूप से जवाब देने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने जताई हैरानी, राज्य सरकार को लगाई फटकार
बिलासपुर हाई कोर्ट में लुकेश्वरी जोश अब्राहम द्वारा दायर जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान जब राज्य के विधि अधिकारी ने यह तथ्य प्रस्तुत किया कि याचिकाकर्ता जेल कर्मियों के साथ मिलकर कैदियों के परिजनों से अवैध वसूली में लिप्त है, तो अदालत हैरान रह गई।
कोर्ट ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई, और डीजी जेल से कहा कि वे शपथ पत्र के साथ अगली सुनवाई तक पूरी जानकारी पेश करें।
सारंगढ़ जेल में पहले से चल रही है वसूली की जांच
इससे पहले सारंगढ़ उप जेल में भी 10 जेल कर्मचारियों व अधिकारियों के खिलाफ कैदियों के परिजनों से ऑनलाइन वसूली और मारपीट की शिकायतों पर जांच जारी है। अब यह नया मामला उस जांच को और अधिक व्यापक बनाने की दिशा में संकेत कर रहा है।
परिजनों ने बैंक ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड और मारपीट की शिकायतें अदालत में पेश की हैं, जिससे स्पष्ट है कि यह कोई एकल घटना नहीं, बल्कि व्यवस्थित गिरोह की गतिविधि हो सकती है।
जेल के भीतर से ऑनलाइन वसूली: सिस्टम पर उठते सवाल
- परिजनों से की गई ऑनलाइन पेमेंट की रसीदें अदालत में दाखिल की गईं।
- वसूली में प्रयुक्त बैंक खाते जेलकर्मियों व उनके सहयोगियों से जुड़े पाए गए।
- धमकी, मारपीट और सुविधाएं देने के नाम पर की गई उगाही की पुष्टि अधिवक्ताओं द्वारा की गई।
कोर्ट के निर्देश
- डीजी जेल को व्यक्तिगत शपथ पत्र के साथ रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।
- राज्य शासन को निर्देशित किया गया है कि कोर्ट के आदेश की प्रति तत्काल डीजी जेल को भेजें।
- 15 जुलाई को एक अन्य आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई होगी, तब तक रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल की जानी अनिवार्य है।
हस्तक्षेप याचिकाएं भी दाखिल
दीपक और दिनेश चौहान ने अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला के माध्यम से कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दायर कर अवैध वसूली व मारपीट की शिकायत की है। उन्होंने भी ऑनलाइन ट्रांजेक्शन का रिकॉर्ड पेश किया है।
क्या कहता है यह मामला?
यह मामला सिर्फ व्यक्तिगत अपराध नहीं, बल्कि सिस्टमेटिक भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग की ओर इशारा करता है। यदि जेलों में बंद कैदियों और उनके परिजनों को इस तरह धमकाकर वसूली का शिकार बनाया जा रहा है, तो यह पूरे जेल प्रशासनिक ढांचे की विफलता को दर्शाता है।
समाप्ति नोट: क्या सुधार की दिशा में उठेंगे कदम?
अब देखना होगा कि क्या इस मामले के बाद जेलों में पारदर्शिता, निगरानी और जवाबदेही को लेकर कोई ठोस नीति या सुधार लागू होते हैं या नहीं।
