
रायपुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में युक्तियुक्तकरण (Rationalization) की प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही के चलते विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO), छुरा, के. एल. मतावले को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी जारी किए गए हैं।
क्या है मामला?
बीईओ के. एल. मतावले पर आरोप है कि उन्होंने:
- अतिशेष शिक्षकों की सूची में विषयवार गंभीर त्रुटियाँ कीं।
- स्कूलों में संकाय की स्थिति को गलत दर्शाया।
- वरिष्ठता क्रम में हेरफेर कर कनिष्ठ शिक्षकों को प्राथमिकता दी।
- निर्धारित तिथि से 10 दिन देरी से रिपोर्ट जमा की।
- जिला स्तरीय समिति के समक्ष बार-बार गलत जानकारी प्रस्तुत की।
गंभीर आरोप: फर्जी आंकड़े, गलत पदस्थापन
- बीईओ ने हायर सेकेंडरी स्कूल पेंड्रा में वाणिज्य संकाय चालू होने के बावजूद वहाँ काम कर रही वाणिज्य की शिक्षिका मधु वर्मा को अतिशेष घोषित कर दिया।
- टिकरापारा और सतनामीपारा रानीपरतेवा में प्रधानपाठकों की वरिष्ठता को नजरअंदाज कर कुंज दीवान को अतिशेष मान लिया गया, जबकि वे वरिष्ठ थे।
- अटैचमेंट वाले शिक्षकों को बचाने के लिए मूल संस्था की जगह संलग्न संस्था में उनकी उपस्थिति दर्शाई गई, जिससे वास्तविक शिक्षक अतिशेष घोषित हुए।
समिति को करनी पड़ी त्रुटियों की पुनः समीक्षा
कई मामलों में जिला स्तरीय समिति को आपत्तियाँ मिलने के बाद:
- पुनर्परीक्षण करना पड़ा।
- ज्वाइनिंग आदेश निरस्त करने पड़े।
- कई शिक्षकों को दोबारा काउंसलिंग के लिए बुलाना पड़ा।
शासन के आदेशों की खुली अवहेलना
बीईओ पर आरोप है कि उन्होंने शासन की मंशा के विपरीत जाकर कार्य किया और छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के अंतर्गत:
- सत्यनिष्ठा (Integrity)
- कर्तव्य परायणता (Devotion to Duty)
के नियमों का उल्लंघन किया।
इस आधार पर शिक्षा विभाग ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।
निष्कर्ष:
इस कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश गया है कि युक्तियुक्तकरण जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही को शून्य सहिष्णुता के साथ लिया जाएगा। विभागीय सूत्रों के अनुसार, अन्य जिलों के बीईओ के कार्यों की भी गहन समीक्षा की जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर अधिक अधिकारियों पर भी कार्रवाई संभव है।



