
बिलासपुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ में प्राचार्य पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर उठे विवाद पर बिलासपुर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए मामले की अंतिम सुनवाई की तारीख 11 जून तय कर दी है। न्यायमूर्ति रजनी दुबे और न्यायमूर्ति सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच में सोमवार को सुनवाई हुई, जिसमें याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने जवाब दाखिल करने के लिए समय की मांग की। कोर्ट ने केवल एक दिन की मोहलत देते हुए स्पष्ट कर दिया कि 11 जून को फाइनल हियरिंग होगी।
पृष्ठभूमि: हाईकोर्ट की पूर्व चेतावनी को नजरअंदाज किया गया
गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने पहले ही 9 जून तक प्राचार्य पदोन्नति प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। इसके बावजूद राज्य शासन द्वारा 30 अप्रैल को प्रमोशन लिस्ट जारी कर दी गई और कुछ जिलों में 1 मई के बाद ज्वाइनिंग भी करा दी गई, जिससे कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष ने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट के आदेश को नजरअंदाज करते हुए कई व्याख्याताओं को पदोन्नति देकर प्राचार्य पद पर ज्वाइनिंग करा दी गई, जो न्यायालयीन अवमानना का मामला बनता है।
याचिकाओं की स्थिति
- मामला 2019 से लंबित याचिकाओं से जुड़ा है।
- साथ ही वर्ष 2025 में बीएड और डीएलएड की पात्रता को लेकर उठी नई याचिकाएं भी इसमें शामिल हैं।
- प्राचार्य पदोन्नति फोरम की ओर से अनिल शुक्ला, राकेश शर्मा, श्याम कुमार वर्मा, रुद्र कुमार वर्मा और विनोद कुमार वर्मा कोर्ट में उपस्थित रहे।
सरकारी आदेश की स्थिति
30 अप्रैल को जारी आदेश के अनुसार, ई संवर्ग के 1524 और टी संवर्ग के 1401, कुल 2925 व्याख्याताओं को प्राचार्य के पद पर पदोन्नत किया गया था। यह आदेश स्पष्ट रूप से हाईकोर्ट के निर्णय के अधीन बताया गया था, इसके बावजूद ज्वाइनिंग करवा लेना अवमानना माना जा सकता है।
कोर्ट की सख्त चेतावनी
डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि इस स्तर पर कोई भी उल्लंघन गंभीर माना जाएगा और यदि न्यायालय की भावना के खिलाफ कार्य किया गया है, तो संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
निष्कर्ष: अब सभी की निगाहें 11 जून की सुनवाई पर टिकी हैं, जब डिवीजन बेंच इस बहुचर्चित पदोन्नति विवाद पर अंतिम रूप से निर्णय दे सकती है। यह फैसला हजारों शिक्षकों के भविष्य को प्रभावित कर सकता है।



