
जशपुर न्यूज धमाका – दुष्कर्म के एक आरोपी के पेशी से लौटते वक्त पुलिस की आंखों में धूल झोंक कर चलती गाड़ी से हथकड़ी निकालकर फरार हो जाने के मामले में जशपुर एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कड़ी कार्रवाई की है। ड्यूटी में लापरवाही बरतने पर पांच पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मामले की जांच के आदेश एसडीओपी जशपुर चंद्रशेखर परमा को दिए गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस जानकारी के अनुसार, रितेश प्रताप सिंह (उम्र 24), निवासी डुगडुगिया, कुनकुरी — एक नाबालिग लड़की को शादी का झांसा देकर दैहिक शोषण करने के आरोप में पहले से जेल में बंद था। बाद में वही आरोपी लड़की से फिर शादी करने की बात पर विवाद में मारपीट करने लगा, जिसके चलते उसे दोबारा गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
2 जून को उसे जिला जेल जशपुर से 6 अन्य आरोपियों के साथ पेशी हेतु कुनकुरी न्यायालय ले जाया गया था। पेशी के बाद लौटते समय, रात्रि 7:45 बजे लोरो घाट के पास आरोपी रितेश प्रताप सिंह ने हथकड़ी की जंजीर को हाथ से निकालकर चलती गाड़ी से कूद कर फरार हो गया।
इन पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। इनमें शामिल हैं:
- प्रधान आरक्षक 97 सुनसाय एक्का
- आरक्षक 481 लव कुश पैंकरा
- आरक्षक 559 जनक साय
- आरक्षक 281 डायमंड तिग्गा
- आरक्षक 205 पुतूरु राम
सभी निलंबित पुलिसकर्मियों को रक्षित केन्द्र जशपुर में संबद्ध किया गया है। निलंबन के दौरान इन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।
जांच शुरू, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
प्रकरण की प्राथमिक जांच का जिम्मा एसडीओपी चंद्रशेखर परमा को सौंपा गया है। घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था और कैदियों के ट्रांसपोर्ट प्रोटोकॉल को लेकर प्रशासनिक सवाल उठने लगे हैं।
यह घटना यह दिखाती है कि पुलिस सुरक्षा में ढील कितना बड़ा खतरा बन सकती है, खासकर जब मामला संवेदनशील हो और आरोपी गंभीर अपराधों में संलिप्त हो।
पुलिस की जवाबदेही पर फिर उठा सवाल
इस घटना ने पुलिस सुरक्षा और कैदियों के ट्रांसपोर्ट सिस्टम की खामियों को उजागर कर दिया है। घटना ने यह भी सिद्ध कर दिया है कि यदि मानक प्रक्रियाओं का पालन न हो, तो आरोपी आसानी से फरार हो सकते हैं, चाहे वे कितने भी गंभीर आरोप में क्यों न हों।



