रायपुर,न्यूज़ धमाका :- मृत्यु से पूर्व परिवार से माताजी ने इच्छा व्यक्त की थी कि उनके शव को कंधा देने और मुखाग्नि देने का काम उनकी पोतियां करें। माताजी के देहावसान के बाद उनकी अंतिम इच्छा को लेकर संबंधी उलझ गए। सिंधी समाज में पुत्रियों के द्वारा मुखाग्नि देने की परंपरा कदाचित ही कभी हुई हो। मथानी परिवार के लिए शोक का दिन था। प्रताप मथानी की माता लीलावंती मथानी का निधन हो गया। इन सबके बीच प्रताप ने तय किया कि माता की अंतिम इच्छा वे अवश्य पूरी करेंगे। उसके बाद उनकी दोनो पुत्रियों दिव्या और राशि ने अपनी दादी की अर्थी को कंधा देने के साथ उन्हें मुखाग्नि भी दी।
सिंधी समाज ने इस पहल का स्वागत किया है। समाज के लोगों ने बताया कि अभी तक सिंधी समाज में पुत्र ही मुखाग्नि देने का काम करते आए हैं। ऐसा संभवत: पहली बार हो रहा है जब पुत्र के रहते हुए पोतियों ने मुखाग्नि दी। बताया गया कि इस पहल के पीछे पिता प्रताप मथानी ने पहल की। उन्होंने अपने पुत्रियों से ये भी कहा कि-तुम्हारा अम्मा से बहुत गहरा लगाव था। इसलिए तुम लोग ही उन्हें मुखाग्नि दो।
साधना प्लस टीम से बात करते हुए प्रताप मथानी की बड़ी पुत्री दिव्या ने बताया कि दादी का निधन 21 अपै्रल को हो गया था। वे कनाडा में जाब करती हैं। दादी के स्वास्थ्य बिगड़ने की सूचना पर वे कनाडा से रायपुर आई। लगभग 36 घंटे की यात्रा के बाद वे रायपुर पहुंच तो गई पर तब तक दादी उन्हें छोड़कर जा चुकी थी। उन्होंने कहा कि वे चाहती हैं कि समाज पुत्र-पुत्रियों में कोई भेद न करें।
