छत्तीसगढमैनपुर

सिंहार गांव में ग्रामीण आज भी झरिया का दूषित पानी पीने के लिए मजबूर

मैनपुर न्यूज़ धमाका /// सिंहार गाँव आज मुलभुत बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। यहां विशेष पिछड़ी जन जाति कमार आदिवासी निवास करते है। जिनके विकास और उत्थान के लिए केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा करोड़ों अरबों रुपए की बजट जारी किया जाता है और तो और इनके उत्थान के लिए अलग से कमार विकास अभिकरण का गठन किया गया है। जिसका जिला मुख्यालय गरियाबंद में कार्यालय है लेकिन पिछले 10 वर्षों से कमार विकास अभिकरण के कोई भी अधिकारी इस गांव में कदम तक नहीं रखे है। जिसके कारण ग्राम पंचायत जिडार के आश्रित ग्राम सिंहार आज बुनियादी सुविधा पेयजल। स्वास्थ्य। शिक्षा। सड़क जैसे सुविधाओं को तरस रहा है।

इस गांव की जनसंख्या लगभग 360 के आसपास है और यहां कमार जन जाति के लोग निवास करते हैं। जिनका मुख्य व्यवसाय अपने पारंपरिक जंगल से मिलने वाले वनोपज और जंगल के बांस से बर्तन जैसे सूपा। टोकनी। झाड़ू। बिझना का निर्माण कर उसे मैनपुर सप्ताहिक बाजार में लाकर बेचना और उससे मिलने वाली आय जीविका उपार्जन करना है। खेती किसानी की स्थिति बेहद खराब है। पथरिला इलाका होने के कारण खेतों में फसल नहीं हो पाता। ग्राम सिंहार में बेहद जर्जर स्कूल भवन है जहां कक्षा पहली से पांचवी तक की पढ़ाई की सुविधा है। वर्तमान में 30 बच्चे इस स्कूल में अध्यनरत है। कक्षा पहली में 9। दुसरी मे 10। तीसरी 4 और पांचवी 7 लेकिन स्कूल भवन सन् 1982 का बेहद जर्जर है। जिसके कारण एक मात्र अतिरिक्त कमरा में एक साथ पांच कक्षाएं संचालित होती है। जहां पांच कक्षाओं के छात्रों को एक साथ दो शिक्षक के द्वारा पढ़ाना कोई जादूगरी से कम नहीं है।

एक तरफ केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा स्वच्छता अभियान के तहत प्रत्येक ग्रामों में शौचालय निर्माण के लिए लाखों रुपए पानी की तरह खर्च किया गया। इस गांव में सभी घरों के लिए शौचालय निर्माण के लिए राशि स्वीकृत हुई लेकिन सभी शौचालय गांव में अधुरा है। ठेकेदार ने शौचालय निर्माण कार्य पूरा ही नहीं किया और तो और शौचालय का शीट कम्बोर्ड भी नहीं लगाया गया सिर्फ दीवार खड़ा कर छोड़ दिया गया।

दुलेश्वरी नागेश सरपंच – ग्राम सिंहार में उनके कार्यकाल से पहले का शौचालय। आवास अधुरा है। साथ ही गांव में रोजगार उपलब्ध कराने आज से मनरेंगा योजना के तहत तालाब निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया है। सिंहार में मुलभुत सुविधा उपलब्ध कराने शासन स्तर पर मांगपत्र और प्रस्ताव कई बार भेजा जा चुका है

आजादी के 75 वर्ष पूरे हो गये लेकिन यहां के ग्रामीणों को आज भी पीने के लिए साफ सुथरा पानी नहीं मिल पा रहा है। जिससे यह आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि विकास इस गांव के लिए कौन सी चिड़िया का नाम है। आज भी यहां के आधे ग्रामीण झरिया खोदकर दुषित पानी से प्यास बुझाने मजबुर हो रहे और तो और गांव में तालाब भी नहीं है इसी झरिया में ग्रामीण निस्तार भी करते है।

साथ ही गांव मे तीन हैंडपंप है लेकिन पानी साफ नहीं निकलता और तो और वन विभाग द्वारा गांव के लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए टैंक निर्माण किया गया है लेकिन मोटर जल जाने से पिछले छह माह से नलजल योजना बंद है। ग्राम सिंहार के ग्रामीण जन्मजय नेताम ने बताया इस गांव मे पूरे कमार जन जाति के लोग निवास करते है कई बार मुलभुत सुविधा उपलब्ध कराने मांगपत्र आवेदन देकर थक चुके है लेकिन हमारे समस्याओ को सुनने वाला कोई नही है।

Chhattisgarh News Dhamaka Team

अमन चीफ एडिटर - छत्तीसगढ़ न्यूज़ धमाका // प्रदेश उपाध्यक्ष, छग जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन छत्तीसगढ // ; हरिभूमि ब्यूरो चीफ जिला कोंडागांव // 18 सालो से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। विश्वसनीय, सृजनात्मक व सकारात्मक पत्रकारिता में विशेष रूचि। कृषि, वन, शिक्षा; जन जागरूकता के क्षेत्र की खबरों को हमेशा प्राथमिकता। जनहित के समाचारों के लिये तत्परता व् समर्पण// जरूरतमंद अनजाने की भी मदद कर देना पहली प्राथमिकता

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