
10 अगस्त 2026 //
केशकाल न्यूज़ धमाका – केशकाल से 15 किमी दूर पीपरा का प्राचीन धार्मिक स्थल शिव, शक्ति और भगवान नरसिंह की आस्था का केंद्र है।
बस्तर अंचल की पावन धरती पर अनेक ऐसे धार्मिक स्थल हैं, जिनका इतिहास लोकमान्यताओं और जनआस्था से जुड़ा हुआ है। केशकाल तहसील मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पीपरा भी ऐसा ही एक प्राचीन धार्मिक स्थल है, जहां शिव, शक्ति और भगवान नरसिंह की आराधना सदियों से होती चली आ रही है। प्राकृतिक हरियाली और गांव से सटे नाले के किनारे स्थित यह स्थल आज श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बन चुका है।
शिवलिंग पर जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं श्रद्धालु
सावन माह प्रारंभ होते ही यहां श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो जाता है। खुले आसमान के नीचे विराजमान स्वयंभू जोड़ा शिवलिंग पर श्रद्धालु जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना करते हैं। विशेषकर सावन के प्रत्येक सोमवार, महाशिवरात्रि एवं माघ पूर्णिमा पर यहां दूर-दूर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

नाग के प्रकट होने के बाद बढ़ी आस्था
स्थल के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले दिनेश पोया बताते हैं कि वर्षों पहले इस स्थान से बैलगाड़ियों का आवागमन होता था। बैलगाड़ी का लोहे का हिस्सा अक्सर शिवलिंग से टकराता था। उस समय कुछ लोगों ने शिवलिंग को दूसरी जगह स्थापित करने के उद्देश्य से खुदाई शुरू की, लेकिन जैसे ही उसे हिलाने का प्रयास किया गया, वहां से एक नाग निकलकर फुफकारने लगा। इसे दैवी संकेत मानकर लोगों ने तत्काल प्रयास रोक दिया और फिर कभी शिवलिंग से छेड़छाड़ नहीं की। इसके बाद ग्रामीणों की श्रद्धा और अधिक बढ़ गई।
अखंड रामायण के बाद हुई झमाझम वर्षा
ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2000 में क्षेत्र में वर्षा नहीं होने से किसान चिंतित थे। फसल सूखने की आशंका के बीच पूरे गांव ने मिलकर अखंड रामायण पाठ कराया। ग्रामीणों का कहना है कि पाठ पूर्ण होने के बाद झमाझम वर्षा हुई और खेत लहलहा उठे। इस घटना ने स्वयंभू शिवलिंग के प्रति लोगों का विश्वास और भी मजबूत कर दिया। इसके बाद ग्रामवासियों ने दिनेश पोया एवं उनके परिवार के सहयोग से यहां चबूतरा और मंदिर का निर्माण कराया। आज यह स्थान व्यवस्थित धार्मिक परिसर का रूप ले चुका है।
प्राचीन नरसिंह प्रतिमा भी आकर्षण का केंद्र
पीपरा में स्थित भगवान नरसिंह की पाषाण प्रतिमा को स्थानीय लोग लगभग 5वीं-6वीं शताब्दी की मानते हैं। प्रतिमा को लेकर एक प्रचलित जनश्रुति है कि, जिसकी मनोकामना पूर्ण होने वाली होती है, वही श्रद्धापूर्वक इस प्रतिमा को उठा पाता है, जबकि अन्य लोग लाख प्रयास करने पर भी सफल नहीं होते। इसी कारण श्रद्धालु यहां विशेष श्रद्धा के साथ दर्शन करने पहुंचते हैं।
शीतला माता के प्रति भी अगाध श्रद्धा
गांव में विराजमान मां शीतला के दरबार में भी वर्षभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। क्षेत्रवासियों का विश्वास है कि, माता अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य स्वीकार करती हैं।
धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाएं
पीपरा का यह प्राचीन धार्मिक स्थल प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक धरोहर और लोकआस्था का अद्भुत संगम है। यदि पुरातत्व विभाग एवं पर्यटन विभाग द्वारा इस स्थल का संरक्षण, शोध एवं समुचित विकास किया जाए तो यह बस्तर संभाग के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में अपनी विशिष्ट पहचान बना सकता है।



