
रायपुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ सरकार ने आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों के लिए एक ऐतिहासिक और मानवीय फैसला लिया है। सरकार अब उन पूर्व नक्सलियों को माता-पिता बनने का अवसर देगी, जिनकी नक्सल संगठन के दबाव में रहते हुए नसबंदी कर दी गई थी। इसके लिए उन्हें टेस्ट ट्यूब बेबी (IVF) की सुविधा बिल्कुल मुफ्त दी जाएगी।
डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने की घोषणा
डिप्टी मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने शनिवार को मीडिया से बातचीत करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नक्सली संगठन में रहते हुए कई युवाओं की जबरन नसबंदी कर दी गई थी, जिससे वे कभी माता-पिता नहीं बन सके। सरकार अब ऐसे सभी आत्मसमर्पण नक्सलियों को परिवार और संतान का सुख देने के लिए IVF प्रक्रिया कराएगी, जिसका पूरा खर्च सरकार उठाएगी।
“नक्सली संगठन ने न केवल इन युवाओं को बंदूक थमाई, बल्कि उनका पारिवारिक अधिकार भी छीन लिया। अब सरकार उन्हें वो हक लौटाएगी, जो कभी उनसे छिन लिया गया था।” — विजय शर्मा, डिप्टी सीएम
कौन होंगे पात्र?
- वे सभी नक्सली जो आत्मसमर्पण कर चुके हैं।
- जिनकी जबरन नसबंदी नक्सली संगठन में रहते हुए कराई गई थी।
- पात्रता की पुष्टि पुनर्वास नीति और मेडिकल जांच के आधार पर की जाएगी।
कितना होगा खर्च?
टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया पर आमतौर पर 2 से 4 लाख रुपये तक का खर्च आता है, लेकिन सरकार यह पूरी राशि खुद वहन करेगी। इसके लिए राज्य सरकार मान्यता प्राप्त IVF क्लीनिकों से समझौता करेगी।
सामाजिक पुनर्वास की दिशा में कदम
सरकार का यह फैसला नक्सलवाद छोड़ चुके लोगों को सम्मानजनक और पूर्ण जीवन देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
- यह सिर्फ पुनर्वास नहीं, बल्कि एक भावनात्मक पुनर्निर्माण है।
- पूर्व नक्सलियों को अब समाज में एक सामान्य परिवारिक जीवन जीने का अवसर मिलेगा।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ सरकार की यह नीति यह दर्शाती है कि अब केवल हथियार छोड़ना ही नहीं, बल्कि सम्मान के साथ पुनर्जीवन पाना भी संभव है। राज्य सरकार का यह कदम संवेदनशील प्रशासन और समावेशी समाज की ओर एक मजबूत संकेत है।
“अब जिन घरों से गोलियां चली थीं, वहां किलकारियां गूंजेंगी।”



