
कोण्डागांव न्यूज़ धमाका /// सघन वनांचल गांव के ग्रामीण बुजुर्ग द्वारा उसके खेतों मिले कोडरी के नवजात बच्चे को अपने घर पर पालने की मामला सामने आया है। जिसमें घर के बुजुर्ग सुदू कोर्राम ने इस नवजात को अपने घर में ला कर पाल लिया हैं और बडे होने पर उसे वापस जंगल में छोड देने का संकल्प जताया है।

ये है मामला – इसी रविवार हंगवा ग्राम के बुजुर्ग सुदू कोर्राम अपने हिरवा के खेतों में देख भाल के लिये गया हुआ था। दोपहर लगभग 12 बजे के आसपास उसने खेत पर जाते ही देखा की एक महुआ के पेड के नीचे कोटरी हिरण की एक छोटी प्रजाति की मादा अपने नवजात बच्चे के साथ मौजूद है। पर जंगल में सुदू कोर्राम की आहट मिलने पर हिरण मां डर कर अपने बच्चे को छोड कर भाग खडी हुयी। सुदू ने जब नवजात कोडरी को देखा तो वह भावुक हो गया। मां हिरण को खोजा पर वह नहीं मिली तो उस नवजात बच्चे को ठंड के मौसम में वही छोड कर आना उसकी मौत का कारण भी बन सकता था इसलिये सुदू कोर्राम उसे अपनी गोद में उठा कर अपने घर ले आया।
ऐसे करते है परिवरिश – बेहद नाजुक बच्चे को पालन बडी जिम्मेवारी थी। सुदू ने सबसे पहले गा्रम सरपंच को जानकारी थी फिर उसे घर में चावल का मंडिया और दूध खिला पिला कर पालना आरम्भ कर दिया। हिरण का नन्हा बच्चा भी तीन दिन में परिजनों से इतना हिलमिल गया कि वह घर में घूमता रहता है। घर से बाहर नहीं जाता। घर के पालतू कुत्ता और बिल्ली भी उसके दोस्त बन गये है। जबकि वे उसके लिये सबसे खतरनाक हो सकते थे।
इंसानियत की मिसाल बने सुदू – सूदू कोर्राम कंठी धारी शाकाहारी है। बस्तर में कंठी धारी समुदाय कटटर षाकाहारी माना जाता है। और वे बिहारी दास बाबा के अनुयायी माने जाते है। सुदू कहते है कि अभी जंगल में यह बच्चा जी नहीं सकेगा। और जंगली जानवरो ंका आसानी से षिकार बन जायेगा। जब यह जंगल में जीने योग्य हो जायेगा तो उसे वहीं छोड दिया जायेगा।
उत्तम गुप्ता डीएफओ कोण्डागांव – जानकारी मिली है। कल अपने कर्मचारी भेज कर जायजा लूंगा। यह एक छोटी प्रजाति का हिरण होता है। इसे कोटरी भी कहते है। अगर वहां अच्छी और सुरक्षित देखरेख हो रही है तो अपने रिकार्ड में लेकर उसकी व्यवस्थाये अगर उचित प्रतीत हुआ तो वहीं उसी घर में भी करायी जा सकती है।

