
बलरामपुर न्यूज़ धमाका /// जिले के सात गांव के 1200 हितग्राही केंद्र सरकार की लाख पालन योजना से जुड़ गए है। भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद देहरादून के विज्ञानियों ने लाख पालन से आर्थिक समृद्धि के लिए तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया है। इन कृषकों के पास 12 हजार से अधिक पेड़ है जिनकी कटाई-छंटाई कर ली गई है।लाख की रंगीली किस्म के बीजों का वितरण भी कर दिया है।
अब कृषक इन्हें पेड़ों में लगाने लगे है। उत्तरप्रदेश व मध्यप्रदेश की सीमा से लगे वाड्रफनगर विकासखंड के ग्राम रघुनाथनगर, रमेशपुर, बभनी, नवगई, शंकरपुर, केसारी एवं गिरवानी के कृषकों का चयन पंचायतों के माध्यम से किया गया है। छत्तीसगढ़ में रंगीली लाख का न्यूनतम समर्थन मूल्य 230 रुपये प्रति किलो निर्धारित है।
उत्पादित लाख की खरीदी वन विभाग द्वारा की जाएगी।किसान चाहे तो खुले बाजार में भी लाख की बिक्री कर सकेंगे। रंगीली किस्म के लाख का उत्पादन पलाश के पेड़ों पर ही ज्यादा होता है। पेड़ की शाखाओं और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप लाख का उत्पादन, बीज संचरण की मात्रा से पांच से छह गुना अधिक होता है।
आदिवासी परिवारों की आर्थिक समृद्धि और चयनित क्षेत्र में पलाश के पेड़ों की अधिकता के कारण इस क्षेत्र का चयन लाख उत्पादन के लिए किया गया है। स्थानीय स्तर पर किसान लाख के उत्पादन से जुड़े हुए है लेकिन बगैर तकनीकी मार्गदर्शन के उत्पादन कम होने से फायदा नहीं होता था।

