
बिलासपुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट, बिलासपुर ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दुष्कर्म के दो मामलों में दोषी ठहराए गए संजय नागवंशी की याचिका को खारिज कर दिया। आरोपी ने अपनी दोनों 10-10 साल की सजाओं को एक साथ चलाने की गुहार लगाई थी, जिसे कोर्ट ने सख्ती से अस्वीकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि आरोपी की आपराधिक प्रवृत्ति और गंभीर अपराध को देखते हुए उसे किसी प्रकार की रियायत नहीं दी जा सकती।
क्या कहा कोर्ट ने?
- आरोपी आदतन अपराधी है, जिसने जमानत पर रिहा होते ही दूसरी बार नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया।
- ऐसे अपराधियों के लिए कोई नरमी नहीं बरती जा सकती।
- दोनो सज़ाएं अलग-अलग (consecutive) रूप से चलेंगी, यानी कुल 20 साल की सजा भुगतनी होगी।
मामले का संक्षिप्त विवरण
- पहला अपराध (2014):
आरोपी ने सरगुजा की एक नाबालिग को शादी का झांसा देकर तीन माह तक दुष्कर्म किया।
→ दिसंबर 2015: पाक्सो कोर्ट ने 10 साल की सजा सुनाई। - दूसरा अपराध (2019):
हाई कोर्ट से मिली अस्थायी जमानत के बाद एक और नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया।
→ पाक्सो कोर्ट, अंबिकापुर ने फिर से 10 साल की कठोर सजा सुनाई।
हाई कोर्ट का कानूनी आधार
- आरोपी ने CRPC की धारा 427(1) के तहत सजा एकसाथ चलाने की मांग की थी।
- अदालत ने कहा:
- दोनों अपराध अलग-अलग हैं।
- दोनों मामलों की सुनवाई और दोषसिद्धि की तारीखें अलग हैं।
- किसी भी निचली अदालत ने सजाएं समानांतर (concurrent) चलाने का आदेश नहीं दिया।
- आरोपी ने पहली सजा को छिपाया, जो गंभीर नैतिक अपराध है।
प्रभाव और महत्व
यह फैसला न्यायिक इतिहास में मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि यह स्पष्ट करता है कि जमानत का दुरुपयोग करने वालों के प्रति अदालत कठोर रुख अपनाएगी। यह पीड़ितों के लिए न्याय की मजबूत उम्मीद और समाज में कानून के प्रति भरोसे की पुष्टि है।
