
08 अगस्त 2026 //
पेंड्रा न्यूज़ धमाका – पेंड्रा के पीएम श्री कन्या विद्यालय में नौवीं की छात्राओं को मिली साइकिलों में खामियां मिलने से योजना की गुणवत्ता जांच पर सवाल उठ रहे हैं
सरकार की योजनाओं का उद्देश्य विद्यार्थियों को सुविधाएं उपलब्ध कराना है, लेकिन पेंड्रा के पीएम श्री स्वामी आत्मानंद हिंदी माध्यम कन्या विद्यालय में साइकिल वितरण के बाद योजना की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। नौवीं कक्षा की छात्राओं को वितरित की गई कई साइकिलों में खराबी और टूट-फूट सामने आई है।
नगर पालिका अध्यक्ष ने किया साइकिलों का निरीक्षण
मामले की जानकारी मिलने के बाद नगर पालिका अध्यक्ष राकेश जालान विद्यालय पहुंचे और छात्राओं को वितरित की गई साइकिलों का निरीक्षण किया। इस दौरान कई साइकिलों की स्थिति देखकर उन्होंने इन्हें गुणवत्ता विहीन बताया। उन्होंने कहा कि छात्राओं को खराब और टूटी-फूटी साइकिलों का वितरण नहीं किया जाना चाहिए। ऐसी साइकिलों से छात्राओं के लिए स्कूल से घर तक सुरक्षित आवागमन करना मुश्किल हो सकता है।
गुणवत्ता जांच पर उठे सवाल
साइकिलों में खामियां मिलने के बाद सबसे बड़ा सवाल सरकारी स्तर पर होने वाली गुणवत्ता जांच को लेकर उठ रहा है। नगर पालिका अध्यक्ष ने प्रशासन से मांग की है कि साइकिल वितरण से पहले उनकी गुणवत्ता की जांच क्यों नहीं की गई और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी है, इसकी जांच होनी चाहिए। सरकारी योजना के तहत खर्च होने वाली राशि के बावजूद यदि छात्राओं तक खराब साइकिलें पहुंच रही हैं, तो गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
निजी खर्च पर खराब साइकिलें ठीक कराने का आश्वासन
छात्राओं की परेशानी को देखते हुए नगर पालिका अध्यक्ष राकेश जालान ने प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार करने के बजाय अपने निजी खर्च पर खराब साइकिलों की मरम्मत कराने का आश्वासन दिया है। इस कदम के बाद अब सरकारी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहा है कि जब एक जनप्रतिनिधि को छात्राओं की साइकिलें अपने खर्च पर ठीक कराने की जरूरत पड़ रही है, तो सरकारी स्तर पर गुणवत्ता जांच आखिर किस स्तर पर की गई थी।
योजना का उद्देश्य सुविधा, फिर खामियां क्यों?
छात्राओं के लिए साइकिल वितरण योजना का उद्देश्य स्कूल आने-जाने में सुविधा और सुरक्षित आवागमन उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि योजना के तहत मिलने वाली साइकिलें ही खराब निकलें तो इसका सीधा असर योजना के उद्देश्य पर पड़ता है। अब देखना होगा कि प्रशासन मामले को केवल खराब साइकिलों की मरम्मत तक सीमित रखता है या फिर गुणवत्ता में लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों की भी जांच कर कार्रवाई करता है।


