
सुकमा न्यूज धमाका – नक्सल प्रभावित सुकमा जिले की सुशीला ने संघर्ष और मेहनत के बल पर अपनी जिंदगी को नई दिशा दी है। पेट्रोल पंप पर नौकरी करते हुए पढ़ाई करने वाली सुशीला अब नगर सेना में शामिल हो गई हैं। उनकी यह उपलब्धि न केवल जिले के लिए गर्व की बात है बल्कि हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
सुशीला का जीवन आसान नहीं था। वर्ष 2006 में दसवीं कक्षा में सप्लीमेंट्री आने के बाद उनकी पढ़ाई रुक गई। लेकिन हार मानने के बजाय उन्होंने स्वाध्याय (प्राइवेट) माध्यम से पढ़ाई जारी रखी और डबल स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की।
साल 2016 से 2025 तक सुशीला ने पेट्रोल पंप पर नौकरी की और कुछ वर्षों तक प्राइवेट जॉब भी की। दिनभर की नौकरी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कभी नहीं छोड़ी। जिला प्रशासन द्वारा संचालित सक्षम कोचिंग से उन्होंने नगर सेना की परीक्षा की तैयारी शुरू की और अंततः सफलता हासिल की।
बेटी के लिए बनीं रोल मॉडल
तलाक के बाद सुशीला ने अपनी 10 वर्षीय बेटी जानवी की परवरिश अकेले की। वह बताती हैं कि कई बार हालात बेहद मुश्किल थे, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उनका कहना है, “मैं अपनी बेटी को यह दिखाना चाहती थी कि मेहनत और हौसले से कोई भी मंजिल पाई जा सकती है।”
प्रशासन ने दी बधाई
सुशीला की इस सफलता पर सुकमा के कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव ने उन्हें बधाई दी और कहा कि उनका संघर्ष और मेहनत अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणादायक है।
