
बिलासपुर न्यूज धमाका – बिलासपुर एयरपोर्ट के विकास में लगातार हो रही देरी और सरकारी उदासीनता को लेकर बिलासपुर हाईकोर्ट ने शुक्रवार को तीखी नाराज़गी जताई। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की डिवीजन बेंच में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने सरकार के रवैये पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा –
“आप स्टेटमेंट दे दीजिए कि हमसे कुछ नहीं हो पाएगा, हम दोनों जनहित याचिकाएं समाप्त कर देंगे।”
जनहित याचिकाएं और कोर्ट की सुनवाई:
एडवोकेट संदीप दुबे और एक अन्य की ओर से एयरपोर्ट के विकास को लेकर दाखिल दो जनहित याचिकाओं पर संयुक्त सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता अधिवक्ता संदीप दुबे स्वयं अपनी याचिका की पैरवी कर रहे थे। उन्होंने कोर्ट को बताया कि एयरपोर्ट की स्थिति वर्षों से जस की तस है और अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।
चीफ जस्टिस का कड़ा रुख:
सरकारी पक्ष की ओर से जब महाधिवक्ता प्रफुल्ल भारत ने विकास कार्यों से संबंधित कुछ फोटोग्राफ्स पेश किए, तो चीफ जस्टिस ने उन्हें खारिज करते हुए कहा –
“इन तस्वीरों में काम कहां दिख रहा है? एक गाड़ी खड़ी है, कुछ लोग पीछे खड़े हैं। क्या यही विकास कार्य है?”
उन्होंने कहा कि बार-बार समय मांगने और वादों के बावजूद नतीजा शून्य है। सरकार के अधिकारी “काम करने की इच्छा शक्ति” नहीं रखते। सीजे ने कहा –
“बॉडी लैंग्वेज देखकर ही स्पष्ट है कि यह मामला सिर्फ टालने वाला है। कोई नई सरकार आएगी, तभी शायद कुछ काम हो सके।”
केंद्र और राज्य – दोनों से नाराज़गी:
सीजे ने सवाल किया कि जब केंद्र और राज्य दोनों में आपकी सरकार है, फिर भी इतने वर्षों में एयरपोर्ट जैसी बुनियादी सुविधा पर काम क्यों नहीं हो सका?
डिफेंस मंत्रालय ने दे दी थी मंजूरी:
याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया गया कि रक्षा मंत्रालय (डिफेंस मिनिस्ट्री) पहले ही 286 एकड़ भूमि पर काम की मंजूरी दे चुका है, जिसमें रनवे का विस्तार भी शामिल है। इस पर कोर्ट ने सवाल किया कि अनुमति मिलने के बाद भी काम क्यों नहीं हो रहा है?
महाधिवक्ता ने बताया कि जमीन के बदले डिफेंस मंत्रालय ने अपेक्षा से अधिक मुआवजा राशि की मांग की है, जिससे प्रक्रिया अटक गई है। राज्य सरकार पहले भूमि का स्वामित्व प्राप्त करना चाहती है, फिर निर्माण शुरू होगा।
चीफ सिकरेटरी और डिफेंस सचिव को तलब:
हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य के मुख्य सचिव और रक्षा सचिव को शपथ पत्र के साथ विस्तृत जानकारी पेश करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई में यह अपेक्षित किया गया है कि सरकार ठोस कार्ययोजना के साथ प्रस्तुत हो।
बैकग्राउंड:
बिलासपुर एयरपोर्ट का विकास कई वर्षों से अधर में है। एयर कनेक्टिविटी बढ़ाने, नाइट लैंडिंग, रनवे विस्तार, और कमर्शियल फ्लाइट्स शुरू करने को लेकर सरकार ने कई घोषणाएं की हैं, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई। यह मामला अब जनहित याचिकाओं के जरिए न्यायालय की निगरानी में है।
संपादकीय टिप्पणी:
यह मामला केवल एयरपोर्ट निर्माण का नहीं, बल्कि शासन की जवाबदेही और कार्यक्षमता का प्रतीक बन चुका है। हाईकोर्ट की नाराजगी से स्पष्ट है कि न्यायपालिका अब इस “विकास के वादे” को कागज़ पर नहीं, ज़मीन पर देखना चाहती है।


