
बिलासपुर। रेलवे को यात्रियों की सुविधा से कोई लेना देना नहीं है, तभी तो एक ट्रेन के सारे कोच बंद कर कोरबा तक भेजती है। पूर्व में यह ट्रेन बिलासपुर से पैसेंजर बनकर छूटती थी। इससे यात्रियों को काफी राहत थी। इसमें यात्रियों को न बैठाने के पीछे रेलवे की मंशा भी समझ से परे है। कोरोना संक्रमण के बाद से नियमित चलने वाली इस ट्रेन को सप्ताह में तीन दिन चलाई जाती है। इन तीन दिनों में तो यात्रियों को असुविधा नहीं होती। पर चार वापसी में परेशानी होती है। कोरबा से इस ट्रेन के सारे कोच को बंद कर बिलासपुर तक लाया जाता है, जबकि इन चारों दिनों में पैसेंजर ट्रेन बनाकर चलाते हैं तो यात्रियों को राहत मिलेगी। जाहिर है कि इससे रेलवे को राजस्व की प्राप्ति भी होगी।
मामला शिवनाथ एक्सप्रेस का है। कोरोना संक्रमण से पहले रेलवे ने एक बेहतर व्यवस्था की थी। इसके तहत सुबह सात बजे इतवारी से बिलासपुर पहुंची शिवनाथ एक्सप्रेस की रैक को दोपहर 2:50 बजे कोरबा तक पैसेंजर बनाकर चलाती थी। कोरबा पहुंचने के बाद यह ट्रेन शिवनाथ एक्सप्रेस बनकर कोरबा से रवाना होती और इतवारी तक जाती थी। इससे यात्रियों को दोपहर में कोरबा जाने के लिए एक पैसेंजर ट्रेन की सुविधा मिल जाती थी।
इस ट्रेन में भीड़ भी रहती थी। अभी भी व्यवस्था वैसी ही है। फर्क केवल इतना है कि पैसेंजर ट्रेन न चलाकर रेलवे कोच को बंद कर कोरबा तक भेजती है। पहले के समय पर ट्रेन चल रही है। इसके बाद भी यात्रियों को इसमें बैठने की अनुमति नहीं देने से स्पष्ट है कि रेलवे को यात्रियों को सुविधा मुहैया कराने में जरा भी दिलचस्पी नहीं है। यही स्थिति छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस की भी है।
