
बिलासपुर न्यूज धमाका – गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी के एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की बर्खास्तगी को बिलासपुर हाईकोर्ट ने अवैध ठहराया है।
जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की सिंगल बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता की मृत्यु मामले के लंबित रहने के दौरान हो गई, इसलिए उन्हें सेवा में बहाल माना जाएगा। साथ ही पत्नी और बच्चों को पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ 60 दिनों के भीतर देने के आदेश दिए गए हैं।
मामले का संक्षिप्त विवरण
- मृतक कर्मचारी: रामनाथ पाण्डेय, बिरकोना निवासी
- पद: चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (फर्राश)
- नियुक्ति: संविदा वर्ष 1996, बाद में नियमित
- बर्खास्तगी की तिथि: 8 फरवरी 2013
- बर्खास्तगी का कारण: कथित अनुपस्थिति, अभद्र व्यवहार और शराब के नशे में ड्यूटी पर आने के आरोप
विशेष आरोप पत्र में 26 फरवरी 2011 को छात्रावास में शराब पीकर प्रवेश करने और चोरी के प्रयास का उल्लेख किया गया था। पाण्डेय ने इन आरोपों से इनकार किया था, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनकी दलील पर विचार नहीं किया और उन्हें बर्खास्त कर दिया।
हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी को अवैध ठहराया
हाईकोर्ट ने पाया कि:
- कुलसचिव को बर्खास्तगी का अधिकार नहीं था – विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत कुलसचिव केवल छोटे दंड जैसे भर्त्सना या वेतन रोकने का अधिकार रखते हैं। बर्खास्तगी का अंतिम निर्णय केवल कुलपति कर सकते हैं।
- प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन – जांच के दौरान पाण्डेय को गवाहों से जिरह करने का मौका नहीं मिला, और चार्जशीट में शामिल नहीं गवाहों के बयान पर भरोसा किया गया।
- साक्ष्य अस्पष्ट – शराब पीने के आरोप को साबित करने के लिए उपयोग किए गए मेडिकल सर्टिफिकेट चार्जशीट के बाद की तारीख के थे।
कोर्ट ने कहा कि जांच निष्पक्ष और वैधानिक नहीं थी, इसलिए बर्खास्तगी को रद्द किया जाता है।
वारिसों को मिलेगा लाभ
चूंकि कर्मचारी की मृत्यु मामले के लंबित रहने के दौरान हो गई थी, हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि उनकी पत्नी और दो बच्चों को सेवा में बहाल कर्मचारी के समान अधिकार मिलेंगे, जिसमें शामिल हैं:
- पेंशन
- ग्रेच्युटी
- अन्य सेवानिवृत्ति लाभ
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि ये लाभ 60 दिनों के भीतर प्रदान किए जाएँ।
मामले की महत्वपूर्ण सीख
- विश्वविद्यालय में बर्खास्तगी का अधिकार केवल कुलपति को है।
- जांच में प्राकृतिक न्याय का पालन अनिवार्य है।
- गवाहों के बयान और मेडिकल प्रमाण का सही समय और वैधता महत्वपूर्ण होती है।
